पोक्सो कानून के तहत नाबालिग से दुराचार करने का अभियोग साबित होने पर अदालत ने एक आरोपी को दस साल के कठोर कारावास और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है। अदालत ने पीड़िता के पक्ष में पीड़िता हर्जाना स्कीम के तहत 25 हजार और आरोपी से मिलने वाली जुर्माना राशि में से आधी राशि बतौर हर्जाना अदा करने के भी आदेश दिए हैं।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलदेव सिंह की विशेष अदालत ने सरकाघाट तहसील के हंसल बैहना (जमणी) निवासी लाल सिंह उर्फ लाला पुत्र भीखम राम उर्फ भीखू के खिलाफ प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन फरोम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट (पोकसो) की धारा 4 भादंस की धारा 376 सहित व धारा 342 के तहत क्रमश: दस साल कठोर कारावास व एक माह साधारण कारावास तथा क्रमश: दस हजार और पांच सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
आरोपी के जुर्माना राशि को समय पर अदा नहीं करने पर उसे क्रमश: 6 माह और एक सप्ताह की साधारण कारावास भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता की माता प्राथमिक पाठशाला में बतौर जलवाहक कार्यरत है। घटना वाले दिन 30 मई 2014 को पीड़िता की माता और भाई स्कूल गए हुए थे। पीड़िता अपने दादी व अंकल-आंटी के साथ घर में थी। पीड़िता की माता जब स्कूल से लौटी तो उन्होंने देखा कि पीड़िता उल्टे कपड़े पहन कर सो रही है। जब उन्होंने पीड़िता से इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि आरोपी ने एक कमरे में ले जाकर उससे दुराचार किया है। हालांकि पीड़िता की दादी ने जब कमरा खोलने के लिए कहा तो आरोपी ने कमरा नहीं खोला और इसे बाद में खोला। जब आरोपी से कमरा बंद करने के बारे में पूछा गया तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
ऐसे में पीड़िता के परिजनों ने पुलिस थाना में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला न्यायवादी आरके कौशल ने 19 गवाहों के बयान कलमबंद करवा कर आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ नाबालिग से दुराचार करने का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है।
जिसके चलते अदालत ने आरोपी को उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है। वहीं पर पीड़िता के परिजनों के माध्यम से उसके पक्ष में पीड़िता हर्जाना स्कीम के तहत 25 हजार तथा आरोपी से प्राप्त होने वाली जुर्माना राशि में से 50 प्रतिशत राशि बतौर हर्जाना अदा करने के भी आदेश दिए हैं।