संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। प्रदेश के सबसे पुराने और बड़े कॉलेजों में शुमार राजकीय वल्लभ महाविद्यालय मंडी के नई तकनीक से बनने वाले भवन का निर्माण कार्य एक वर्ष से बंद पड़ा है। अतिरिक्त बजट का प्रावधान न होने से कार्य पूर्व सरकार के कार्यकाल से ही ठप पड़ा हुआ है।
पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने इस भूकंप रोधी पांच मंजिला शैक्षणिक भवन बनाने के लिए लगभग 26 करोड़ से ज्यादा की धनराशि जारी की थी, लेकिन बाद में भवन को स्टील फेब्रिकेटिड बनाने के लिए दोबारा से एस्टीमेट बनाया गया, जो कि लगभग 41 करोड़ रुपये है। इस भवन का निर्माण कार्य 2021 में शुरू हुआ जिसमें ज्यादातर कार्य पूर्ण हो चुका है, लेकिन इतने बड़े भवन को छत डालने और फिनिशिंग का कार्य पूर्व सरकार के समय में ही ठप हो गया था। इसका कारण अतिरिक्त बजट का प्रावधान न होना है।
नई सरकार भी अभी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। इस कारण करोड़ों की लागत से बनी यह इमारत अधूरी पड़ी है, जिसे पूरा करने के लिए अभी भी करीब 15 करोड़ की धनराशि की जरूरत है। भवन निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाला सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा है। जिसमें टाइल, मार्वल, पेंट आदि शामिल है। भवन के निर्माण में हो रही देरी के चलते प्रदेश के सबसे पुराने और बड़े काॅलेज में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निर्माणाधीन भवन में कई प्रकार के संदिग्ध भी कालेज समय में देखे गए हैं जिससे छात्राओं को भी डर सताने लगा है। छात्रा मनीषा, जरीना व चेतना ने जनहित में प्रदेश सरकार से जल्द इस काॅलेज भवन के निर्माण कार्य को पूरा करने की गुहार लगाई है।
वहीं, इस संबंध में मंडी सदर विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि स्टील फेब्रिकेटिड स्ट्रक्चर बनाने के चलते इस भवन के निर्माण कार्य की लागत बढ़ गई और पूर्व सरकार के समय जारी की गई धनराशि से यह कार्य पूरा नहीं हो पाया व भवन का निर्माण कार्य बंद हो गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्तमान सरकार से भी इसके लिए लगभग 41 करोड़ रुपये शी प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। बताया कि आने वाले समय में काॅलेज के इस भवन के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए फिर से टेंडर होंगे। इसके लिए उन्होंने लोक निर्माण विभाग से संशोधित एस्टीमेट मांगा है जिसके बाद सरकार से बजट मिलते ही कार्य को पूरा कर लिया जाएगा।