अखिल भारतीय दवा एवं ड्रग्स विक्रेता संघ के आह्वान पर जिलाभर में दवाइयों की दुकानें बंद रहीं। मंडी, सुंदरनगर, जोगिंद्रनगर, सरकाघाट, रिवालसर सहित सभी कस्बों में दवा विक्रेताओं ने दुकानें बंद रखी।
विक्रताओं ने सेरी मंच से लेकर पूरे शहर का चक्कर लगाया तथा उपायुक्त कार्यालय में जाकर एडीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर को ज्ञापन सौंपा। संघ के जिलाध्यक्ष योगेश वर्मा ने कहा कि ई-पोर्टल से देश में दवाओं में कमी आएगी। दवा जैसे संवेदनशील विषय के लिए ई-पोर्टल न सिर्फ अव्यवहारिक है अपितु उपचार के विकल्प बीमारी से भी बदतर हैं।
उन्होंने कहा कि ऑनलाईन फार्मेसी केंद्रीय ई-पोर्टल का विचार केमिस्टों को स्वीकार नहीं है तथा ई-पोर्टल नीति से भारत वर्ष में दवाओं का अभाव होगा। उन्होंने कहा कि दवा मूल्य नियंत्रण नीति में केमिस्टों का जो शोषण होगा वह उन्हें तनिक भी स्वीकार नहीं है। केंद्रीय दवा कानून शोधन में दवा विक्रेताओं का विचार स्वीकार करने से 8.50 लाख केमिस्ट और 50 लाख कर्मचारी इससे प्रभावित होंगे।
इस अवसर पर एसोसिएशन के जिला महासचिव प्रवेश गुप्ता, दिनेश ठाकुर, रक्षू, कीर्तन सिंह सहित जिला के तमाम केमिस्ट भी उपस्थित थे। उधर, रिवालसर, सरकाघाट और धर्मपुर उपमंडल के थोक और परचून दवा विक्रेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने मेडिकल स्टोर बंद रखे। जोन के प्रधान बीडी चौहान ने बताया दवा जैसे संवेदनशील विषय के लिए ई-पोर्टल अव्यवहारिक है।