मंडी। सरकार के पहली जनवरी से एपीएल परिवारों को सस्ता आटा न देने के फैसले से मंडी जिला के 182376 परिवारों के लगभग 681288 सदस्य प्रभावित होंगे। नए साल से उपरोक्त परिवारों को बाजार से महंगे दामों पर आटा खरीदना होगा। केंद्र सरकार की ओर से गेहूं की आपूर्ति बंद होने के कारण प्रदेश सरकार ने एपीएल परिवारों को सस्ता आटा मुहैया करवाने से हाथ पीछे कर लिए हैं।
अभी तक केंद्र सरकार प्रदेश को गेहूं देता था और प्रदेश सरकार गेहूं का आटा तैयार कर डिपुओं के माध्यम से एपीएल परिवारों को मात्र साढ़े आठ रुपये किलो देता था। मंडी जिला में 182376 परिवारों को प्रति परिवार 13 किलो सस्ता आटा दिया जाता है। लेकिन, अब प्रदेश सरकार ने सस्ता आटा न देने की घोषणा की है। जिससे जिला की आधी से ज्यादा आबादी को परिवार का संचालन करने के लिए महंगे दामों पर दुकानों से आटा खरीदना पड़ेगा। हालांकि अब प्रदेश सरकार आटे के जगह चावल देने की योजना बना रही है।
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जिला के पंडोह क्षेत्र की गृहिणी दयावंती देवी ने कहा कि आटा न देने के फैसले से रसोई के बजट में वृद्धि होगी। प्रदेश सरकार को इस फैसले को लागू करने से पहले कुछ और व्यवस्था करनी चाहिए।
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तुंगल क्षेत्र की शकुंतला देवी ने कहा कि आटे के स्थान पर चावल की बजाए प्रदेश सरकार को गेहूं देना चाहिए। जिससे लोगों को कुछ राहत होगी।
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डैहर की रीता देवी ने कहा कि अब उन्हें महंगे दाम पर आटा खरीदना पड़ेगा। प्रदेश सरकार चावल देने की बात कर रही है। लेकिन फिर भी उन्हें आटा दुकान से खरीदना पड़ेगा क्योंकि उनके घर में दो समय के भोजन में चावल कम बनने हैं।
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मंडी शहर की सुनीता कश्यप ने कहा कि एपीएल परिवारों को आटा न देने के फैसला बिल्कुल सही नहीं है। सरकार को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए जल्द हल निकालना चाहिए, ताकि एपीएल परिवारों को राहत मिल सके।
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उधर, खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मिलाप चंद शांडिल ने कहा कि प्रदेश सरकार से जो भी निर्देश मिलेंगे राशन की आपूर्ति उसी अनुसार डिपुओं को जारी की जाएगी।