मंडी। शिक्षित बेरोजगार महिलाएं आज पारंपरिक पकवान व हस्त निर्मित उत्पाद तैयार कर आर्थिक रूप से समृद्ध बन रही है। सराज घाटी की चंपा शर्मा स्थानीय स्तर पर गाय का शुद्ध घी और शहद बेच कर अपनी और महिला समूह से जुड़ी महिलाओं की आर्थिकी को मजबूत कर रही हैं।
शिकारी माता स्वयं सहायता समूह जंजैहली की प्रधान चंपा शर्मा ने कहा कि उन्होंने 2002 में स्वयं सहायता समूह का गठन किया। उस समय दस महिलाओं को शामिल किया गया। बैंक से 25 हजार रुपये का ऋण लेकर स्थानीय उत्पाद तैयार किए। अच्छा मुनाफा होने पर स्वयं सहायता समूह ने बैंक से डेढ़ लाख का लोन लेकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाने के बाद स्वेटर, जुराबें सहित अन्य तरह के उत्पाद तैयार किए। उन्हें मेलों और त्योहारों पर स्टालों में बेचा।
प्रतिस्पर्धा के चलते महिलाओं की ओर से तैयार सामान की मांग अधिक होने पर महिलाओं ने ग्रामीण स्तर पर शुद्ध घी, शहद, दालें, बड़ियां, सीरा, कोदरे का आटा, अचार चटनी आदि तैयार कर एक बार फिर से अच्छी आमदनी अर्जित की। आज ग्रामीण महिलाएं लोगों से घी, शहद और दालें आदि लेकर इन्हें स्टॉलों में विक्रय करती हैं।
बताया कि बाजार में शुद्ध घी और शहद की काफी मांग है। लोगों को घी और शहद नौ रुपये किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है। अन्य दिनों में महिलाएं अपने घरों में अचार, चटनी, मुरब्बा, स्वेटर आदि तैयार कर रही हैं। आज स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सभी महिलाएं 10 से 12 हजार रुपये प्रति महीना कमा रही हैं। महिलाएं स्वयं तैयार उत्पादों से भविष्य में और ज्यादा बेहतर करने की इच्छुक हैं ताकि अपनी आर्थिकी को और बेहतर बना सकें।
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