रोजाना 700 किलो देसी घी, 200 किलो मक्खन, 700 किलो दही और एक हजार किलो पनीर कर रहा तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। चक्कर मिल्क प्लांट ताजा दूध से नौनिहालों के पोषण से लेकर सेना के जवानों की सेहत का ध्यान रख रहा है। वर्ष 1972 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री फखरुद्दीन अली अहमद की ओर से प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की उपस्थिति में इस प्लांट का शुभारंभ हुआ था। शुभारंभ के 52 साल बाद दुग्ध प्रसंघ की चक्कर इकाई दुग्ध उत्पादन में अग्रणी बनकर उभरी है। इकाई प्रदेश के बच्चों को पोषित करने के साथ सेना के जवानों को दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति कर रही है।
50 हजार लीटर क्षमता के मिल्क प्लांट चक्कर से गाय के पैकेट बंद दूध की आपूर्ति मंडी और कुल्लू जिला में की जा रही है। रोजाना 700 किलोग्राम देसी घी, 200 किलो मक्खन, 700 किलो दही, एक हजार किलो पनीर और एक हजार बॉटल स्वादिष्ट दूध उत्पादित हो रहा है। फ्लेवर्ड मिल्क हल्दी, इलायची व स्ट्रॉबेरी के स्वाद में उपलब्ध है जबकि कॉफी स्वाद में जल्द लांच किया जा रहा है। मंडी के अलावा मनाली, कुल्लू, बिलासपुर, हमीरपुर, घुमारवीं में वितरकों और मिल्क बार के लिए यहां से दुग्ध उत्पाद भेजे जा रहे हैं। मंडी, पंडोह, नेरचौक, सुंदरनगर, बिलासपुर व हमीरपुर आदि में नए वितरक जोड़े जा रहे हैं।
देसी घी का उत्पादन मंडी के चक्कर और रामपुर इकाई में ही होता है। चक्कर इकाई के तहत न्यूट्रिमिक्स, सेवईयां इत्यादि भी तैयार की जा रही हैं। इनकी आपूर्ति प्रदेश के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में की जाती है। इकाई के तहत छह दुग्ध अभिशीतन केंद्र तांदी, बालीचौकी, कोटली, लम्बाथाच, कुन्नू, कटौला और कुल्लू जिला के मौहल में स्थापित किए गए हैं। 25 बल्क मिल्क प्रापण केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।
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रोज हो रही 80 हजार लीट दूध की आपूर्ति
दुग्ध प्रसंघ की चक्कर इकाई के प्रभारी विश्वकांत शर्मा ने बताया कि इकाई से 216 दुग्ध सहकारी समितियां जुड़ी हुई हैं। पंजीकृत इकाइयों के माध्यम से ही दूध प्रापण का कार्य किया जा रहा है। इन समितियों से 16 हजार से अधिक किसान परिवार सीधे तौर पर जुड़े हैं। प्रतिदिन मिल्क प्लांट चक्कर में लगभग 80 हजार लीटर दूध की प्राप्ति हो रही है।