मंडी। हिमाचल प्रदेश के कॉरपोरेट सेक्टर (विभिन्न निगमों और बोर्डों) के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपने हक की लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर ले जाने का बिगुल फूंक दिया है।
लंबे समय से पेंशन बहाली और अन्य वित्तीय लाभों की बाट जोह रहे सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने मंडी में आयोजित एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय अधिवेशन में अपनी आवाज बुलंद की।
इस दौरान संगठन की मजबूती के लिए पुरानी समन्वय कमेटी और एक्शन कमेटी को भंग कर नई प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। सरकार को आगाह किया गया कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। निर्णय लिया गया कि सभी पेंशनर नेता आत्मा राम के गुट के साथ मिलकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे और अपनी मांग प्रमुखता से उठाएंगे।
बीएस चौहान को प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है। उनके साथ वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में जोगिंदर सारटा और महासचिव के पद पर एनके बाली को जिम्मेदारी दी गई है। संगठन की बात जनता और सरकार तक पहुंचाने के लिए कमलेश शांडिल को मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। इसके अलावा केवल चौहान को मुख्य संगठन सचिव और दौलत ठाकुर को मुख्य कैशियर बनाया गया है।
प्रधान बीएस चौहान ने कहा कि कॉरपोरेट सेक्टर में पेंशन की प्रणाली 1 अप्रैल 1999 से लागू की गई थी लेकिन 30 नवंबर 2004 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए इस सुविधा को बंद कर दिया गया, जिससे हजारों कर्मचारियों का बुढ़ापा असुरक्षित हो गया है। केवल 1999 से लेकर 2004 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ही इसका लाभ मिला और अभी तक उन्हें मिल रहा है लेकिन 2004 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ये लाभ नहीं दिए जा रहे हैं। वर्तमान में लगभग 6,730 कर्मचारी ऐसे हैं जो इस व्यवस्था से प्रभावित हैं।
0000