नेरचौक (मंडी)। पशुओं की खरीद फरोख्त के लिए मशहूर भंगरोटू नलवाड़ मेले का अस्तित्व खत्म हो रहा है। अब पशुधन की खरीदफरोख्त न होने से अब यह मेला कागजों में ही सिमटता जा रहा है।
पूर्व में मेले के दौरान विभिन्न तरह की खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित कुश्ती का आयोजन किया जाता था। मेले को वर्ष 2014 में स्थानीय लोगों और कारोबारियों के प्रयास से नलवाड़ के साथ देवता मेले का दर्जा मिला था। उसके बाद दोबारा से मेला अपना अस्तित्व खोने लगा है। नेरचौक बाजार के कारोबारी प्रवीण ठाकुर, राकेश, दिनेश शर्मा, गोविंद, रोमीन शर्मा, सुरेश चौधरी आदि ने कहा कि चैत्र माह के साजे के दिन यानी 14 मार्च से ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ खूंटी गाढ़ कर बैल पूजन के साथ शुरू होता था।
इस दौरान स्थानीय देवी देवताओं की मौजूदगी में भव्य जलेब भी निकाली जाती थी। इस बार नगर परिषद नेरचौक और कुछ स्थानीय लोगों ने मेले को औपचारिक तौर पर शुरू किया है। नगर परिषद की अध्यक्ष एवं कुछ स्थानीय लोगों ने 14 मार्च को बल्ह घाटी के ग्राम देवता सत देव बाला कामेश्वर मंदिर कमेटी को निमंत्रण दिया कि 18 मार्च को निकलने वाली जलेब में शिरकत करने के लिए देवता को साथ लाएं।
हालांकि नगर परिषद की अध्यक्षा और कुछ स्थानीय व्यापारियों ने सोमवार रात्रि को एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन करवाया। लोगों ने जिला और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि मेले के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए हस्तक्षेप करें। नगर परिषद की अध्यक्ष नर्मदा अभिलाषी ने बताया कि वह मेले का आयोजन बड़े स्तर पर करवाना चाहती थीं लेकिन इसमें किसी का सहयोग नहीं मिल रहा है। 18 मार्च को तीन देवी-देवताओं की मौजूदगी में जलेब निकली जाएगी। संवाद