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Mandi News: अनुराग ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर दिया जोर

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हमीरपुर। सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम की ओर से आयोजित अभिव्यक्ति 1.0 एशियन पार्लियामेंट्री डिबेट प्रतियोगिता के समापन समारोह में भाग लिया।
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अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विमर्श, संवाद और खुली बहस भारत की सभ्यतागत चेतना का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। इन्हें पश्चिम से आयातित अवधारणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भारतीय विश्वविद्यालयों और बौद्धिक संस्थानों को केवल यूरोकेंद्रित दृष्टिकोण तक सीमित रहने के बजाय स्व-बोध की भावना के साथ भारत की अपनी ज्ञान परंपराओं को समझना चाहिए।
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न्याय, तर्क और लोक कल्याण पर आधारित भारतीय चिंतन परंपराओं को आधुनिक सार्वजनिक विमर्श, कानून और नीति निर्माण से जोड़ा जाना आवश्यक है। भारतीय धर्मपरंपरा में वाक केवल तर्क प्रस्तुत करने का माध्यम नहीं, बल्कि सत्य और धर्म की स्थापना का साधन माना गया है।
उन्होंने विधि के विद्यार्थियों से कहा कि न्यायालय में बोले गए शब्दों का प्रभाव केवल उस समय की बहस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि न्यायिक व्याख्याओं और कानूनी नजीरों के माध्यम से समाज के व्यापक वर्ग को प्रभावित कर सकता है।
देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के लिए एक भारत श्रेष्ठ भारत के अंतर्गत आयोजित काशी तमिल संगमम और सौराष्ट्र तमिल संगमम जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख किया।
उन्होंने वैचारिक नक्सलवाद शब्द का प्रयोग करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों में भारत की पहचान और इतिहास को कमजोर करने का प्रयास करते हैं।
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भावी विधि विशेषज्ञों से अपने पेशे को एक पवित्र दायित्व के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया।
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