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Mandi News: सड़कों पर टैग लगे पशु, मालिक कौन...सभी मौन

Thu, 30 Jan 2025 12:11 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
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सरकाघाट कालेज के मैदान में गोवंश । स्रोत जागरूक पाठक
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मंडी। पशुओं को खुला छोड़ने पर अंकुश लगाने के लिए पशुपालन विभाग की टैगिंग मुहिम भी प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है। लोग अब मवेशियों के कान या टैग काटकर उन्हें सड़कों और अन्य स्थानों पर लावारिस हालत में छोड़ रहे हैं। इन पशुओं का मालिक कौन है, इसपर सभी मौन धारण किए हैं।
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पिछले पांच वर्षों में जिला मंडी में 3.83 लाख गोवंश और 75 हजार भैंसों की टैगिंग की गई है। मगर अभी समस्या जस की तस बनी हुई है। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 2006 के अनुसार पंजीकरण के बाद अगर पशुओं को बेसहारा छोड़ा जाता है तो जुर्माना किया जा सकता है। मगर अधिनियम के अनुसार कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

स्थानीय निकायों के पार्षद और पंचायतों के प्रधान भी ऐसे मामलों में अपनी शक्तियों का प्रयोग करने में असमर्थ हैं। केवल शिकायतें दर्ज कर रहे हैं। हालांकि कुछ पंचायत प्रतिनिधि अपने स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। मगर जुर्माना न होने के कारण पशु मालिक मवेशियों को दूसरी जगह छोड़कर बच निकल रहे हैं। पशु को बेसहारा छोड़ने पर जुर्माने के अलावा छह महीने से लेकर एक साल तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन पहचान न होने के कारण इस पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
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प्रधान बोले- शक्तियां ही नहीं तो कार्रवाई क्या करें

बेसहारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए हमारे पास कोई शक्तियां नहीं है। हम शिकायत कर सकते हैं। 2022 में पूर्व सरकार ने पंचायत में शैड बनाने के लिए राशि दी थी। जगह न होने के कारण बना नहीं पाए। इन पर तभी लगाम लगेगी जब सरकार छोड़ने वालों पर कार्रवाई करें।

-दिले राम, प्रधान, बालीचौकी



लावारिश पशुओं पर तभी लगाम लग सकती है जब स्थानीय फार्मासिस्ट टैग लगाने के बाद साल में एक बार मालिकों से उनके पशुओं के बारे में जानकारी हासिल करे। अधिकारियों को भी गंभीर होना पड़ेगा। गोसदन समाधान नहीं है। प्रधान के पास कोई भी शक्ति नहीं है।

-विकास गुप्ता, प्रधान, बग्गी



वार्ड में लावारिस पशुओं के छोड़ने के दो मामले आए थे। जांच के बाद उन्हें मालिकों तक पहुंचाया। मगर यह स्थायी समाधान नहीं है। पशुओं के मालिक दूसरी जगह उनके कान काटकर छोड़ रहे हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद पशु की सूचना विभाग को दिलाना अनिवार्य करवानी चाहिए।

- कृष्ण भानू, पार्षद, बैहना वार्ड, नगर निगम मंडी



हम पशुओं के गोसदन भेजने के लिए प्रमाण पत्र ही दे सकते हैं। उन पर कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है। न ही पशुओं के निजात दिलाेन के लिए पंचायत के पास बजट का प्रावधान है। लावारिश पशुओं के कारण जमींदार से लेकर वाहन चालक हर कोई परेशान है।

-शुभम शर्मा, प्रधान, टांडू





फार्माशिष्ट और डॉक्टर के पास भी नहीं अधिकार

पंचायत प्रधानों के पास जुर्माना करने का अधिकार है। टैग से वे पशुओं की पहचान करके छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। स्थानीय फार्मासिस्ट और डॉक्टर के पास कोई अधिकार नहीं हैं। हर वर्ष पशुओं की टैगिंग की जा रही है। कान काटकर छोड़ने वालों की पहचान होने के बाद उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

-डॉ. मुकेश महाजन, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग मंडी





पुलिस के पास अज्ञात की ओर से पशु छोड़ने पर कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। अगर कोई बेसहारा पशु को हिट करता है, तब पुलिस नियम के अनुसार कार्रवाई कर सकती है। पशुओं को खुला छोड़ने वालों पर पंचायत अपने स्तर पर एक्शन ले सकती है। पुलिस थानों में ऐसी बेहद शिकायतें आती हैं।

-दिनेश शर्मा, डीएसपी, मंडी



कोई बाहर से गाड़ी में लाकर पशुओं को छोड़ता है तो प्रधान पुलिस में शिकायत कर सकते हैं। पुलिस कार्रवाई करेगी। अगर कोई पंचायत में रहने वाला छोड़ता है तो पंचायत कार्रवाई के लिए अधिकृत है।
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-विनय चौहान, बीडीओ, द्रंग

सरकाघाट कालेज के मैदान में गोवंश । स्रोत जागरूक पाठक

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