कोविड की चौथी लहर से बचने के लिए एहतियात बरतना बेहद जरूरी है। पहली, दूसरी लहर में कोविड काफी घातक रहा। कई लोगों की जानें गईं। लेकिन तीसरी लहर में वैक्सीनेशन के चक्र ने लोगों को सुरक्षित रखा।
अब चौथी लहर आने की आशंका है। खुद को सुरक्षित रखने के लिए बूस्टर डोज जरूरी है। अमर उजाला फाउंडेशन सामाजिक सरोकार से जुड़े वैक्सीनेशन अभियान को आगे बढ़ाने में आगे आया है। लोगों को वैक्सीनेशन के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। इस मुहिम में कई गणमान्य लोग जुड़कर वैक्सीनेशन की अलख जगा रहे हैं। इस अभियान में, युवावर्ग खासी भूमिका निभा सकता है। बुलंद हौसले वाले युवा वर्ग ने महामारी के वक्त जनसेवा कर संक्रमितों को दवाएं, खाना, सैनिटाइजर, मास्क आदि पहुंचाए। यही नहीं मृतकों का दाह संस्कार भी करवाया। अब अमर उजाला के माध्यम से युवावर्ग लोगों से वैक्सीनेशन की अपील कर रहा है।
- लॉकडाउन के दौरान स्कूल-कॉलेज बंद होने से पढ़ाई ऑनलाइन चली। सरकार द्वारा वैक्सीनेशन अभियान चलाया गया। अधिकांश लोगों में वैक्सीन के प्रति डर था। उन्हें समझाने पर वैक्सीनेशन के लिए तैयार कर वैकसीन करवाया। रिश्तेदारों और दोस्तों को ऑनलाइन हौसला दिया। अभी जो लोग बूस्टर डोज नहीं लगवा रहे हैं उनसे आग्रह है कि अस्पतालों में जाकर डोज जरूर लगवाएं।
भारती ठाकुर, छात्रा एमएससी बॉटनी मंडी कॉलेज
कोरोना काल में संक्रमण को लेकर लोगों में खौफ इस तरह से हावी था कि वे परिजनों, रिश्तेदार का निधन होने पर उनके शवों को छूने से भी परहेज कर रहे थे। ऐसे में किराये के कमरों में रहने वाले कुछ कॉलेज छात्रों ने संक्रमित मृतकों का विधिवत रूप से अंतिम संस्कार किया। लोगों को वैक्सीन लगवाने के बारे में भी प्रेरित किया। आज दोबारा वही स्थिति बन गई है। लोग भ्रम में आकर बूस्टर डोज लगवाने से आनाकानी करने लगे हैं।
विशाल ठाकुर, छात्र मंडी कॉलेज
कोविड-19 के दौरान जब लॉकडाउन लगा। उसमें सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों के परिवारों को परेशान होना पड़ा। उन लोगों को कई दिनों तक राशन नहीं मिला। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं और युवक मंडलों, महिला मंडलों ने मिल कर उनके लिए भोजन की व्यवस्था करवाई। देर रात तक लोगों को राशन बांटा। जो लोग आज बूस्टर डोज नहीं लगवा रहे, हो सकता है कल उन्हें पैसे देकर इसे लगवाना पड़े। क्योंकि आज बूस्टर डोज को निशुल्क लगाया जा रहा है।
मयंक शर्मा, स्थानीय युवा मंडी
प्रदेश सरकार द्वारा कोविड काल से अब तक लोगों की सुरक्षा के लिए कई अभियान चलाए। जागरूकता होने पर लोगों ने महामारी की पहली, दूसरी और तीसरी वेब को कुशलता से पार किया। अब चौथी वेब को देखते हुए सरकार द्वारा बूस्टर डोज लगाई जा रही है। कुछ लोग भ्रमित होकर पहल नहीं कर रहे। लोगों को लगता है कि इसे लगाने से शरीर में दुष्प्रभाव पड़ेंगे। ऐसा कुछ नहीं है।
अभिषेक ठाकुर, स्थानीय निवासी मंडी
कोविड 19 के दौरान जब लोग संक्रमण से सहमे हुए थे, उस समय कोविड अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों, स्टाफ और मरीजों के लिए विभिन्न संस्थाओं ने सहयोग कर भोजन, साफ सफाई समेत अन्य तरह से सहयोग किया। कई लोग कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार नहीं थे, उनके घरों में जाकर उन्हें वैक्सीन लगवाने के लिए मनाया गया। इससे सभी को कोरोना की दोनों वैक्सीन लगी। आज लोग भ्रमित होकर दोबारा वैक्सीन लेने में आनाकानी कर रहे हैं। इससे उनका ही नुकसान है।
चिराग, कॉलेज छात्र
बूस्टर डोज लगाने के लिए हर वर्क के लोगों को आगे आना चाहिए। कुछ लोगों को भ्रम हैं कि डोज लगाने के बाद दो तीन दिन तक वह काम नहीं कर पाएंगे या कई साइड इफेक्ट्स होंगे। ऐसा न सोचें। पहले दो डोज लगाकर आपको कोविड से सुरक्षा ही मिली है। इसलिए तीसरी लहर में कोविड का प्रकोप कम दिखा। अब फिर से कोविड पांव पसार रहा है, इसलिए बूस्टर डोज जरूरी है।
रितिका जिंदल, युवा आईएएस, एसडीएम मंडी