सरकार के समक्ष रखेंगे अपना पक्ष, शिकारी देवी वन्य जीव अभयारण्य से सटे इको सेंसेटिव जोन में शामिल किए हैं गांव
समिति में हर प्रभावित गांव के 5-5 सदस्यों को किया शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। शिकारी देवी वन्य जीव अभ्यारण्य से सटे इको सेंसेटिव जोन में शामिल करने के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। सराज के 39 गांवों के प्रभावित ग्रामीणों ने बुधवार को थुनाग में बैठक कर इस मसले पर निर्णायक लड़ाई लड़ने का फैसला लिया है। इसके लिए ग्रामीणों ने 25 सदस्यीय संयुक्त संघर्ष समिति गठित की है। समिति में प्रत्येक प्रभावित गांव के 5-5 सदस्यों को शामिल किया गया है।
समिति में नरेंद्र रेड्डी को संयोजक, सोहन लाल झैंकर, देवी सिंह और बिहारी लाल को सह संयोजक नियुक्त किया गया। इसके अलावा टेक सिंह, दीनानाथ, मनसा देवी, हरीश कुमार, प्रेम सिंह और हेमराज, श्याम, मोहन, महेंद्र, ज्योति प्रकाश, तिलक राज, पवन ओम चंद और मोहर सिंह को सदस्य बनाया गया है। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि आगामी ग्रामसभा में जोनल मास्टर प्लान के तहत योजनाओं को डाला जाएगा। साथ ही इन क्षेत्रों के लिए आर्थिक पैकेज मांगा है। बैठक में शिकारी देवी वन्य जीव अभ्यारण्य को निरस्त कर सामान्य जंगल घोषित करने की मांग भी उठाई गई।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं संघर्ष समिति के सह संयोजक सोहन लाल झैंकर ने बताया कि वन विभाग और वन्य जीव विंग ने ग्रामीणों के साथ धोखा किया है। बिना सहमति के इको सेंसटिव जोन में डाला है। सेंक्चुरी एरिया में 360 परमिट धारक गुज्जर समुदाय और गद्दी समुदाय के घुमंतू चरवाहे आते हैं। इसके अलावा लगभग 50 दुकानें और ढाबे चले हुए हैं। हेलीपैड और सड़कें बनाई गई हैं। इन मानवीय गतिविधियों के कारण यह क्षेत्र वन्य जीव शून्य हो गया है, फिर भी केंद्रीय वन संरक्षण, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने गरीब लोगों को इको सेंसेटिव जोन में डाला गया है। यह तर्कसंगत नहीं है।
बैठक के बाद प्रभावित ग्रामीणों ने एसडीएम थुनाग को ज्ञापन सौंप कर इको सेंसेटिव जोन को निरस्त करने का आग्रह किया है। संघर्ष समिति के संयोजक नरेंद्र रेड्डी ने बताया कि सेंसेटिव जोन क्षेत्र के लोगों के अधिकारों का हनन है जिसे सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखेगी अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो सड़कों पर उतर जाएंगे।