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Mandi News: रिवालसर में आस्था का अद्भुत संगम, महासंगम आरती संग छेश्चू मेले का शुभारंभ

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पवित्र रिवालसर झील किनारे दीप जलाते श्रद्धालु। संवाद
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रिवालसर झील तट पर हिंदू, सिख बौद्ध श्रद्धालुओं की भक्ति का महासागर
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संवाद न्यूज एजेंसी
रिवालसर (मंडी)। पवित्र रिवालसर झील के तट पर मंगलवार शाम राज्य स्तरीय छेश्चू मेले का शुभारंभ दिव्य महासंगम आरती और भक्तिमय भजन संध्या के साथ हुआ। दीपों की आलौकिक छटा, मंत्रोच्चार और घंटियों की गूंज के बीच हिंदू, सिख और बौद्ध समुदाय के श्रद्धालुओं ने एक साथ आरती में भाग लेकर धार्मिक एकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का सशक्त संदेश दिया। झील परिसर देर शाम तक श्रद्धालुओं से भरा रहा और पूरा वातावरण भक्तिरस में डूबा नजर आया।
झील के किनारे मंगलवार शाम आस्था और एकता का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला, जब हिंदू, सिख और बौद्ध समुदाय के लोगों ने एक साथ दीप प्रज्ज्वलित कर सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की। दीपों की जगमगाहट से आलोकित झील परिसर में मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने सामूहिक प्रार्थना की। इस मौके पर एडीसी मंडी गुरसिमर सिंह, एपीएमसी अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, एसडीएम बल्ह स्मृतिका नेगी, नायब तहसीलदार कृष्ण चंद व अन्य ने शिरकत की।
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बता दें कि 25 फरवरी को प्रात: 11 बजे मेले का औपचारिक शुभारंभ शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर करेंगे। रिवालसर को त्रिवेणी संगम और बहुधार्मिक आस्था के केंद्र के रूप में जाना जाता है। यह स्थल बौद्ध, हिंदू और सिख समुदायों के लिए समान रूप से श्रद्धा का केंद्र है। छेश्चू मेला गुरु पद्मसंभव को समर्पित पारंपरिक उत्सव है, जिसमें धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मुखौटा नृत्य और बौद्ध परंपराओं की विशेष झलक देखने को मिल रही है। उधर, एसडीएम बल्ह स्मृतिका नेगी ने बताया कि महासंगम आरती का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश दिया। बॉक्स
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भक्तिमय प्रस्तुतियों से गूंजा पंडाल
रिवालसर में आयोजित भजन संध्या कार्यक्रम में गायक काकू राम ठाकुर ने गुरु वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। जैसे ही उन्होंने मंच संभाला, पूरा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो गया और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। कार्यक्रम के दौरान काकू राम ठाकुर ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी। उन्होंने अज है जगराता, न बड़ी तेरे करके , मेरे भोले डमरू किथे बजया, वे मनमोहने बाबा बालक नाथा , शिव कैलाशा रे वासी तथा श्यामा तू अपना न बनया मैं रही तेरे भरोसे ते जैसे भजनों को सुमधुर स्वर में गाकर संध्या को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। उनकी प्रस्तुति के दौरान श्रद्धालु तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका उत्साहवर्धन करते रहे। कई भक्त भजनों पर झूमते और नाचते नजर आए। कार्यक्रम स्थल पर देर रात तक श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।

पवित्र रिवालसर झील किनारे दीप जलाते श्रद्धालु। संवाद

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