नेरचौक (मंडी)। नेरचौक निवासी दया देवी आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। दया देवी (47) का संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और परिश्रम से सफलता की कहानी लिखी जा सकती है। साधारण परिवार में जन्मी दया देवी के पिता शायरू राम एक मिस्त्री थे। छह बेटियों और एक बेटे वाले इस परिवार ने गरीबी के बावजूद कभी हिम्मत नहीं हारी। दया देवी ने 12वीं तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद आईटीआई से ब्यूटीशियन का कोर्स किया। उसने कला को अपने जीवन का आधार बना लिया।
शुरुआत में संसाधनों की कमी थी, लेकिन दया देवी ने हुनर और मेहनत से नेरचौक में ब्यूटी पार्लर स्थापित किया। आज उनके पार्लर में न केवल महिलाएं सुंदरता निखारने आती हैं, बल्कि कई युवतियां रोजगार के गुर भी सीखती हैं। अब तक 100 से अधिक लड़कियां दया देवी से प्रशिक्षण हासिल कर चुकी हैं। व्यवसाय के साथ दया देवी अपने परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाती हैं।
दया देवी ने बताया कि उसने ठाना था कि मेहनत के बल पर कुछ अलग कर दिखाना है। आज मुझे गर्व है कि मैंने एक दर्जन से अधिक लोगों को रोजगार दिया है। कहा कि पति पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हैं। बेटी कॉलेज में प्रोफेसर है और बेटा मनाली में होटल व्यवसाय संभाल रहा है।
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