मंडी। मिलावट खोरी पर शिकंजा कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन शक के आधार पर लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने तक खाद्य सामग्री ग्राहकों को बेच दी जाती है। लैंब से दो सप्ताह के बाद ही सैंपलों की जांच रिपोर्ट मिलती है। इस्तेमाल करने के बाद ही ग्राहकों को खाद्य सामग्री मिलावटी व घटिया होने का पता चलता है। जांच प्रक्रिया में देरी के चलते मिलावटखोर बच रहे हैं। सैंपल भेजने के 14 दिन बाद एफएसओ को रिपोर्ट मिलती है। ऐसे में दुकान में रखी गुणवत्ताहीन खाद्य सामग्री बिक जाती है।
त्योहारी सीजन में मुनाफा कमाने के लिए खाद्य सामग्री में मिलावट होने की ज्यादा संभावना रहती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने छापामारी तेज कर दी है। खाद्य सामग्री में मिलावट होने के शक पर विभागकेवल सैंपल भर सकता है। इसे जांच के लिए प्रदेश की एकमात्र फूड टेस्टिंग लैब कंडाघाट भेजा जाता है। यहां से जांच रिपोर्ट मिलने के लिए कम से कम 14 दिन लग जाते हैं। मौके पर केवल खराब व बासी मिठाइयों व खाद्य सामग्रियों को ही फेंकवाया जा सकता है। मिलावट रोकने के अभियान केवल हवा साबित हो रहे हैं। रिपोर्ट के मिलने के बाद ही सैंपल फेल होने के बारे में सूचना मिलती है, लेकिन तब तक मिलावटी मिठाई की खेप बिक जाती है। ऐसे में मात्र दुकानदार पर अभियोग ही चलाया जाता है, जबकि लोगों के घरों तक खेप को पहुंचने से रोका नहीं जा सकता है।
इधर, जिला खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी एलडी ठाकुर ने बताया कि मिलावट होने पर सैंपल भरे जाते हैं। वहीं, खराब व बासी खाद्य सामग्री को मौके पर ही नष्ट कर दिया जाता है।
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मिलावटखोरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाती है। नियमानुसार हर प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। सुधार के मामलों में सुधार नोटिस दिया जा रहा है। मिलावट से बचने के लिए लोगों का जागरूक होना भी अनिवार्य है।
-डा. एनके भारद्वाज, जिला स्वास्थ्य अधिकारी मंडी।
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वर्ष सैंपल लिए फेल सैंपल जुर्माना
2011-12 45 09 छह लाख
2012-13 47 25 13 लाख
2013-14 50 - 30 लाख