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अफसरों के गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते इस बार नहीं होगा जिलास्तरीय भंगरोटू देव मेला

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नहीं होगा जिला स्तरीय भंगरोटू मेला, बजट के अभाव में प्रशासन ने खींचे हाथ
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14 से 18 मार्च तक मनाया जाता था ऐतिहासिक मेला, नहीं दिया देवताओं को निमंत्रण
पारंपरिक मेलों के संरक्षण के दावे हवा, सीएम के गृह जिला में प्रशासनिक अव्यवस्था
गोविंद ठाकुर
नेरचौक(मंडी)। ऐतिहासिक जिला स्तरीय नलवाड़ देव मेला भंगरोटू इस बार प्रशासनिक अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया है। सीएम के गृह जिला में अफसरों के गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते 14 से 18 मार्च तक मनाया जाने वाला मेला इस बार नहीं होगा।
बजट का रोना रोते हुए मेला कमेटी ने न तो मेले को लेकर देवी देवताओं को न्योते भेजे हैं और न ही आयोजन को लेकर किसी तरह की तैयारियां हुई हैं। न ही मेला मैदान में व्यापारिक गतिविधियों के लिए स्टाल की निलामी प्रक्रिया कवायद चढ़ पाई है। ऐसे में पारंपरिक मेलों के संरक्षण के नेताओं के भाषण भी महज कागजी साबित हो रहे हैं। हालांकि मेले के आयोजन को लेकर नेरचौक व्यापार मंडल और स्थानीय लोगों ने दिसंबर माह में ही प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया था, लेकिन प्रशासन के टाल मटौल भरे रवैये के चलते कारोबारी पीछे हट गए हैं। स्थानीय लोगों में छोटू राम ठाकुर, दिनेश कुमार शर्मा, तेजपाल शर्मा, अभिनंदन शर्मा, निक्का राम, वीरेंद्र कुमार, बलदेव कुमार, लहर ठाकुर, बालकराम संख्यान, हरमीत सिंह, विनोद कुमार भारती, वीरेंद्र लखन पाल, महेंद्र पाल गुप्ता, संजय गुप्ता, सुभाष सोनी, रमेश ठाकुर, गजेंद्र सिंह, राकेश कुमार ने प्रशासन के समक्ष रोष जताया है। इनका कहना है कि प्रशासन को पहले तैयारियां करनी चाहिए थी।
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विश्व मानचित्र पर जगह बना रहा नेरचौक
मुख्यमंत्री के गृह जिले मंडी में नेरचौक सबसे अधिक तेजी से विकसित हो रहा है। मेडिकल कॉलेज, मेडिकल विवि, नर्सिंग कॉलेज समेत टमाटर और अन्य नकदी फसलों की पैदावार के लिए यह क्षेत्र जाना जाता है। जबकि सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट इंटरनेशनल हवाई अड्डा का निर्माण भी यहीं प्रस्तावित है। ऐसे में विशेष स्थान होने के बावजूद भी नेरचौक मेडिकल कॉलेज में ऐतिहासिक मेलों का न होना, स्थानीय प्रशासन की काबलियत पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

1942 में शुरू हुआ था ऐतिहासिक नलवाड़ मेला
वर्ष 1942 से ऐतिहासिक नलवाड़ मेल शुरू हुआ था। राजा जोगिंदर सिंह के शासनकाल में भंगरोटू नलवाड़ मेले की शुरुआत हुई थी। पहली बार मेले का शुभारंभ लक्ष्मण सिंह नेगी ने भंगरोटू के ऐतिहासिक मैदान में खूंटा गाड़ कर वर्ष 1942 के चैत्र माह के प्रथम साजे को किया था। तब से लेकर आज तक नलवाड़ मेला धूमधाम से मनाया जाता रहा है। हालांकि बीच में कई बार मेले का क्रम टूटा है।

बदला है स्वरूप, जलेब में हजारों करते हैं शिरकत
पहले यह मेले पशुओं के व्यापार के लिए जाना जाता था। ग्राम देवता सत श्री देव बाला कामेश्वर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष धर्म सिंह ठाकुर ने बताया कि 2014 से भंगरोटू नलवाड़ मेले को बदलकर नलवाड़ देव मेला कर दिया गया है। तब से स्थानीय एक दर्जन देव बाला कामेश्वर देवताओं को मेले के लिए निमंत्रण दिया जाता है। उनके साथ-साथ दो दर्जन और देवी-देवताओं को मेले में बुलाया जाता है। भव्य जलेब नेरचौक बाजार से होते हुए भंगरोटू के ऐतिहासिक मैदान में जाती है। जिसमें हजारों लोग शिरकत करते हैं उसी से मेले की शुरुआत की जाती है देव समाज में निमंत्रण न मिलने से भारी आक्रोश है
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उपयुक्त फंड नही ं: एसडीएम
एसडीएम बल्ह धर्मेश कुमार ने कहा कि मेला करने के लिए उपयुक्त फंड नहीं है। प्रयास किए जा रहे हैं। उधर, व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि मेला जिला स्तरीय है। प्रशासन को मेले का आयोजन करवाना चाहिए। दिसंबर माह से मेले के आयोजन को लेकर बैठक का इंतजार कारोबारी और आम लोग कर रहे थे, लेकिन आयोजन को लेकर कोई बैठक नहीं हुई।
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