देव नाटी: पड्डल मैदान में देवनाटी का विहंगम दृश्य।
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मंडी। चौहारघाटी और इलाका उत्तरशाल के देवी-देवताओं की नाटी के साथ ही महाशिवरात्रि महाकुंभ में देव नाटी उत्सव का समापन हो गया। देव नाटी के अंतिम दिन चार गढ़ों के देवों ने नशा मुक्ति का संदेश दिया। चौहारघाटी के देवी-देवता इससे पहले जलेब में तीन दशक बाद शिरकत कर नशामुक्ति का संदेश दे चुके हैं। मंगलवार को पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ बजती शहनाई पर झूमते देवी-देवताओं और देवलुओं के नृत्य से ऐतिहासिक पड्डल में माहौल देवमय हो गया। इस अवसर पर उपायुक्त एवं सर्व देवता कमेटी के अध्यक्ष शिव पाल शर्मा भी उपस्थित रहे। इस दौरान ऋग्वेद ठाकुर ने देवताओं की पूजा अर्चना की तथा उनके साथ नाटी में भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से युवाओं को मंडी जिले की देव संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है।
इन देवताओं ने की शिरकत
जिले की चौहार घाटी तथा उत्तरशाल क्षेत्र के नौ देवताओं के देेवलुओं ने देव रथ के साथ नाटी में भाग लिया। इनमें श्री देव हुरंग नारायण, देव घडौंनी नारायण, देव पशाकोट, देव पेखर का गहरी, देव दरुण का गैहरी, देव त्रैलु का गहरी, देव गलू का गहरी, देव बथेरी का गहरी तथा रियागड़ी का गहरी देवता शामिल रहे। सर्वदेवता समिति के अध्यक्ष पंडित शिवपाल शर्मा ने कहा कि चौहारघाटी के चार गढ़ों के देवता धूम्रपान पर जुर्माना लगाते हैं। देव नाटी में इन गढ़ों के देवों ने नशा मुक्ति का संदेश दिया है।
ये चार प्रमुख गढ़, जहां प्रतिबंधित है धूम्रपान
चार गढ़ यानी चौहारघाटी। हर गढ़ में प्रमुख देवता है। इन गढ़ों में धूम्रपान सदियों से प्रतिबंधित है। आज भी इस परंपरा को लोग संजीदगी से निभाते हैं। चार गढ़ों में हस्तपुर, देव गढ़, कुट गढ़ और अमर गढ़ शामिल हैं। बड़ादेयो हुरंग नारायण के पुजारी ईश्वर दास ने कहा कि हस्तपुर गढ़ में बड़ादेयो हुरंग नारायण, देव पेखर का गहरी, देवगढ़ में देव पशाकोट, मता खुंगणी, कुट गढ़ में गलू का गैहरी और अमर गढ़ में देव द्रुण का गैहरी, तैरला गैहरी, घड़ौनी नारायण वास करते हैं। इन गढ़ों में आज भी धूम्रपान प्रतिबंधित है। उपायुक्त मंडी एवं शिवरात्रि मेला कमेटी के अध्यक्ष ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि बड़ादेयो हुरंग नारायण ने दशकों बाद जलेब में शिरकत कर धूम्रपान न करने का संदेश दिया है। देव आस्था के इस महाकुंभ में दशकों बाद यह अनूठा नजारा देखने को मिला।