मंडी। सांस्कृतिक राजधानी के नाम से प्रसिद्ध छोटी काशी मंडी में लोहड़ी पर्व भी तन्मयता के साथ मनाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लोहड़ी पौष के अंतिम दिन सूर्यास्त के बाद अर्थात माघ संक्रांति से पहली रात को मनाया जाने वाला पर्व है। 13 शाम को जगह जगह अंगीठा जलेगा और पूजा अर्चना के बाद लोहड़ी पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। मंडी में लोहड़ी के लिए बाजार सज चुके हैं। मूंगफली, रेवड़ी, गच्चक, तिल, पोहा से दुकानें अटी पड़ी हैं। लिहाजा इस पर्व पर खरीदारी में लोग रुचि ले रहे हैं। वहीं कारोबारियों को इस पर्व में बेहतर कारोबार की आस जगी है। सेरी मंच के अलावा स्कूल बाजार, मोती बाजार, भूतनाथ, महाजन बाजार में किराना की दुकानों को खास तरह की लोहड़ी सामग्री से सजाया गया है। जबकि कई तरह के गुड़ और शक्कर भी बाजार में उपलब्ध है।
यह है लोहड़ी के सामान की कीमतें
मूंगफली 40 से लेकर 100 रुपये किलो, गच्चक पैकेट 160 से लेकर 200 तक, पोहा 80 रुपये किलो, तिल 300 ग्राम पैकेट 80, रेवड़ी 200 ग्राम 40 रुपये, पापकार्न 10 रुपये का पैकेट, देसी घी 360 से लेकर 400 रुपये किलो तक।
ऐसे मनाते हैं त्योहार
लोहड़ी फसल बिजाई और कटाई से संबंधित विशेष त्योहार है। इस दिन आग का एक अलाव बॉनफायर की तरह जलाया जाता है। पूजा के बाद इसके चारों ओर लोग नृत्य करते हैं। इस दौरान आग में रेवड़ी कहीं-कहीं मक्के के दाने आदि डालते हैं और बाद में इसे ही प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। इस दौरान दुल्ला भट्टी का प्रशंसा गायन भी किया जाता है। लोहड़ी से पहले घर घर जाकर लोहड़ी मांगने का भी प्रचलन है। हालांकि यह प्रथा अब धीरे धीरे सिमटने लगा है। पहले बड़े लोग भी इसमें शामिल होते थे। लेकिन, अब बच्चों तक लोहड़ी मांगने की परंपरा सिमट गई है।
नव विवाहित जोड़े और पुत्र का जन्म
जिनके घर में लड़के का विवाह हुआ होता है अर्थात नयी दुल्हन आती है। उनके लिए ये पर्व और खास होता है। जिनके घर पुत्र का जन्म हुआ होता है वे भी रेवड़ी बांटकर इसे मनाते हैं। विवाहित पुत्रियों को मां के घर से त्योहार भेजा जाता है। इसमें कपड़े, मिठाई, रेवड़ी आदि शामिल होते हैं। लोहड़ी पर्व नववधू और नवजात शिशु के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।
तो शहर में इस तरह बदली लोहड़ी का स्वरूप
बुजुर्गों की जुबानी
अपने घर तक ही सीमित रह गए हैं लोग
मंडी। मंडी के 76 वर्षीय प्रकाश कपूर ने कहा कि अब लोहड़ी मनाने की परंपरा ही बदल गई है। आजकल के बच्चों को मोबाइल और टीवी को देखने से ही फुर्सत नहीं मिलती हैै। उन्होंने कहा कि लोहड़ी से छह-सात दिन पहले ही घर-घर जाकर लोहड़ी मांगते थे और जो भी खाद्य सामग्री होती थी उसे लोहड़ी के दिन किसी एक जगह पर आग की अंगीठी जलाकर मनाते थे और गीत गाकर खूब आनंद लेते थे। परंतु अब लोग अपने घर से निकलना ही पसंद नहीं करते हैं। आज का हर व्यक्ति अपनी जीवन शैली को अपने घर और कार्यालयों तक ही सीमित रख रहा है। जिससे वह अपनी जीवन शैली और रीति रिवाज को दिन-प्रतिदिन भूलता जा रहा है।
चौकी गांव के डागू राम ने कहा कि वह पिछले 40 सालों से मंडी शहर में कारोबारी का काम कर रहे है। उनका कहना है कि पहले के दौर में लोहड़ी के दिन जो भी पकवान बनते थे उन्हें अपने घर में ही बनाया जाता था। परंतु आजकल समय की कमी के कारण लोग बाजारों से ही मिठाइयां और अन्य पकवान खरीदते हैं। उन्होंने बताया कि जब वह अपने समय में लोहड़ी मनाते थे तो वे शरीर पर आटा लगाते थे और घर-घर जाकर लोहड़ी मांगते थे। परंतु आजकल समय के अभाव के कारण लोग इस परंपरा को भूलते जा रहे हैं।
6-7 बजे तक है लोहड़ी में पूजा का शुभ मुहूर्त
सुंदरनगर (मंडी)। 13 जनवरी को लोहड़ी पर्व इस बार बेहद शुभ मुहूर्त में आया है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र है और मकर राशि में शुक्र प्रवेश करेगा। जिसके अगले ही दिन मकर में सूर्य आएगा। जिसके चलते यह पर्व सबके लिए ऐश्वर्य बढ़ाने वाला और सुख समृद्धि देने वाला है। ज्योतिष शोध संस्थान सुंदरनगर के संयोजक डा. रोशन लाल बाली ने बताया कि इस दिन शाम सूर्य अस्त के बाद कभी भी पूजा की जा सकती है। लेकिन, शाम को 6-7 बजे तक का समय पूजन के लिए बेहद बढ़िया है। इस मौके पर अग्नि में तिल, गुड़ और मीठी कचौरी (स्थानीय भाषा में बाबरू) अर्पित कर इसकी सात बार परिक्रमा करें और माथा टेकें।