मंडी। बर्फबारी से सेब के पौधों को जरूरी चिलिंग ऑवर्स मिल गए हैं। इससे पौधों में जान आ गई है। बागवान बंपर पैदावार की उम्मीद में बागबाग हो गए हैं। सीजन की शुरुआत में मौसम की बेरुखी से बागवान चिंतित थे। नए साल जनवरी माह में मौसम की मेहरबानी से चिलिंग ऑवर्स पूरे हो पाएंगे। अगर कुछ और बर्फबारी होती है तो पौधों को जरूरी चिलिंग ऑवर्स मिल जाएंगे। वर्तमान में सेब के पौधों को रोपने और तौलिये करने के लिए भी जमीन में अच्छी नमी है। इससे भी सेब बागवान उत्साहित हैं। सराज, बालीचौकी और गोहर के बागवानों कर्म सिंह, आलम चंद, प्रदीप कुमार, कर्म सिंह, सोम दत्त, भीम सिंह आदि का कहना है कि पिछले साल सेब के उत्पादन में गिरावट आई थी। इस बार मौसम का मिजाज खुशी देने वाला है। उधर गेहूं की बिजाई करने वाले किसान खुश हैं। जिला में कई स्थानों पर बिजाई हो चुकी है। मटर के भी मौसम प्रयुक्त बना हुआ है। जबकि फ्रांसबीन और लहसुन के लिए भी वातावरण अनुकूल है।
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यह है चिलिंग आवर का फंडा
सेब की रॉयल फसल के लिए करीब 1600 से 1800 और स्पर फसलों के लिए लगभग 600 से 800 चिलिंग ऑवर्स होने चाहिए। इसी पर सेब की अच्छी पैदावार निर्भर करती है। चिलिंग ऑवर्स का मतलब सात डिग्री सेल्सियस के तापमान में सेब के पेड़-पौधों का पनपना है ताकि सेब की पैदावार बढ़िया हो सके।
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सेब की पैदावार के लिए मौसम अनुकूल है। जितनी बर्फ और मौसम ठंडा रहेगा उतनी ही अच्छी सेब की पैदावार होगी। सेब पौधों के चिलिंग ऑवर्स भी पूरे होंगे।
-एपी कपूर, उपनिदेशक बागवानी विभाग