मंडी। दल बदले पर नहीं बदले लोगों के दिल। छोटी काशी में नेताओं में दल बदलने की रीत पुरानी है। इसके बावजूद नेता लगातार जीत रहे हैं। पंडित सुखराम से लेकर महेंद्र ठाकुर समेत कई नेताओं ने दल बदले। लेकिन, जनता ने इनके प्रति दिल नहीं बदले। जयराम सरकार में नंबर दो पर शपथ लेने वाले महेंद्र ठाकुर अलग-अलग चार चुनाव चिन्हों पर जीत दर्जकर क्षेत्र की जनता के दिलों पर राज कर रहे हैं। पंडित सुखराम की अगवानी में वर्तमान भाजपा सरकार में मंडी जिले से बने दो मंत्री महेंद्र ठाकुर और अनिल शर्मा कांग्रेस सरकार में विधायक और मंत्री रह चुके हैं। इन दोनों ही नेताओं ने दल तो बदले लेकिन, क्षेत्र की जनता ने इनके लिए अपने दिल नहीं बदले। सूबे की हॉट सीट पर पंडित सुखराम के बेटे अनिल शर्मा ने 10 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की तो धर्मपुर में 12 हजार के करीब मतों से महेंद्र ठाकुर ने जीत दर्ज की। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे क्षेत्र के लोग दल बदलने के बाद भी दशकों से इन नेताओं से जुड़े हैं। सुखराम परिवार ने विधानसभा चुनावों में 1993 से और महेंद्र सिंह ने 1990 के बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा है। दोनों लगातार अपने हलकों में दल बदलने के बावजूद जीत दर्ज कर रहे हैं।
दल बदल कर सातवीं दफा जीते महेंद्र
वर्ष 1990 में निर्दलीय चुनाव लड़ विधानसभा पहुंचे और तीन वर्ष बाद कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा में फिर दाखिल हुए। वर्ष 1998 में पंडित सुखराम की पार्टी हिविकां में शामिल हो गए और भाजपा के साथ गठजोड़ की सरकार में अहम लोक निर्माण विभाग मिला। इसके बाद लोकतांत्रिक मोर्चा से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे। 2007 में फिर दल बदल कर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ कर भाजपा सरकार में परिवहन मंत्री बने। अब तीसरी दफा भाजपा के टिकट पर विधानसभा पहुंच कर नंबर दो बन गए हैं। सीएम जयराम के बाद नंबर दो पर महेंद्र ठाकुर ने शपथ ली। इस दफा करीब 12 हजार के मतों से जीत हासिल कर धर्मपुर क्षेत्र में अपना ही रिकार्ड तोड़ दिया। अलग-अलग पार्टी चिन्हों पर चुनाव जीतने का वर्ल्ड रिकार्ड भी इनके नाम ही है। महेंद्र ठाकुर अपने क्षेत्र के लोगों को चेहरे से नहीं उनके नाम से पहचानते हैं। यही वजह है कि उन्होंने दल तो बदले लेकिन लोगों के दिल उनके प्रति नहीं बदल पाए।
सुखराम परिवार ने नहीं देखा हार मुंह
मंडी में राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले पंडित सुखराम को संचार क्रांति का जनक माना जाता है। उनके साथ ही दल बदलने की रिवायत को भी जोड़ा जाता है। कांग्रेस की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहने के बावजूद पंडित सुखराम अपनी पार्टी बनाने के बाद आखिर भाजपा में शामिल हो गए। उनके बेटे अनिल शर्मा अब भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गए हैं। भगवा रंग में रंगने के बाद भी उनके परिवार को लोगों ने नहीं नकारा। बल्कि जीत का फासला तीन गुना बढ़ गया। कांग्रेस प्रत्याशी को उन्होंने इस दफा 10 हजार के अधिक मतों से हराया।