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बल्ह के युवाओं ने टमाटर की खेती से मोड़ा मुंह

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25 बीघा में उत्पादन करके पछता रहा हूं: यादवेंद्र खेतों में जैविक टमाटर को संभालता यादवेंद्र। - फोटो : अमर उजाला
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नेरचौक (मंडी)। टमाटर के लिए प्रसिद्ध बल्ह में किसान परिवारों की भावी पीढ़ी टमाटर उत्पादन से मुंह मोड़ने लगी है। युवाओं का कहना है कि टमाटर का उचित मूल्य न मिलने के कारण अब टमाटर उत्पादन पर मेहनत घोटे का सौदा लगने लगी है। छह माह की कड़ी मशक्कत के बाद बिचौलियों और सरकारी अव्यवस्था के कारण टमाटर कौड़ियों के भाव बिक रहा है। ऐसे में किसान परिवारों की आर्थिकी को गहरा झटका लग रहा है। युवाओं का कहना है कि जब तक सरकार यहां सरकारी सब्जी मंडी के अलावा आधुनिक विपणन से उत्पादकों को लैस नहीं करती, तब तक बल्ह के टमाटर उत्पादकों की हालत में सुधार नहीं होगा। लिहाजा, युवा वर्ग अपने पुश्तैनी कृषि के काम में कम ध्यान लगा रहे हैं और निजी सेक्टर या खुद की दुकानदारी आदि में भविष्य तलाश रहे हैं।
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25 बीघा में उत्पादन करके पछता रहा हूं : यादवेंद्र
यादवेंद्र शर्मा कर कहना है कि माननीय राज्यपाल की बातों से बहुत प्रभावित हुआ। जैविक खेती की तरफ रुझान किया। इसी के चलते मैरामसीत में 25 बीघा से अधिक जमीन पर जैविक टमाटर का उत्पादन किया है लेकिन बहुत बड़ी भूल हो गई। पछता रहा हूं। जैविक खेती वाले टमाटर का क्रेट सौ रुपये तक नहीं बिका। सरकार बड़ी-बड़ी बातें कर रही है और जैविक खेती को बढ़ावा देने वालों के लिए व्यवस्थाएं माकूल नहीं हैं। अब दोबारा मुश्किल ही खेती करूं। हर्बल टमाटर के लिए इस बार केंचुआ खाद का ही प्रयोग किया था। आर्थिक हानी हुई है।
युवाओं की जुबानी
कौड़ियों के भाव बिक रहा टमाटर : राकेश
राकेश ठाकुर निवासी नागचला का कहना है कि उन्होंने इलेक्ट्रिकल कांट्रेक्टर का पेशा अपना लिया है। पहले टमाटर की पैदावार में अच्छा पैसा बन रहा था लेकिन कुछ सालों से टमाटर कौड़ियों के भाव बिक रहा है। घाटा हो रहा है, लिहाजा कृषि का काम बेहद कम कर दिया है।
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टमाटर की खेती घाटे का सौदा : हरदेव
हरदेव सिंह का कहना है कि टमाटर की खेती घाटे का सौदा साबित हो रहा है। छह माह तक कड़ी मशक्कत करने के बाद भी किसानों को अगर गुजारे लायक कीमत न मिले तो पैदावार के लिए पसीना बहाने का क्या फायदा। लिहाजा, खेती की तरफ उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा।
टमाटर उत्पादन करना ही बेवकूफी : विजय
विजय कुमार पढ़ने-लिखने के बावजूद खेती की तरफ आकर्षित हैं। उनका कहना है कि बहुत ज्यादा जमीन होने के चलते खेतीबाड़ी की तरफ काफी ध्यान दिया। टमाटर उत्पादन शुरू किया। टमाटर की मांग घट गई है। व्यवस्थाओं के अभाव में टमाटर उत्पादन करना बेवकूफी है। नतीजतन यह काम छोड़ दिया है।
खेतों में मेहनत पानी में बह रही : हरीश
हरीश का कहना है कि टमाटर के खेती में की गई मेहनत पर पानी फिर रहा है। किसान परेशान हैं। सब्जी मंडी नहीं है। मनमाने ढंग से टमाटर की कीमतें तय होती हैं। इसमें उत्पादक को छोड़कर बाकी सभी पैसा कमा रहे हैं। अगर उत्पादक को उसकी मेहनत तक नसीब न हो तो वह खेती करे क्यों?
मेहनत का पैसा भी पूरा नहीं होता : रमेश
रमेश ठाकुर का कहना है कि पिछले कई वर्षों से टमाटर की खेती करते आ रहे थे। मेहनत का पैसा भी पूरा नहीं होता। टमाटर के बीज और खाद आदि की तो बात छोड़ो। घाटे के चलते टमाटर की खेती बंद कर दी है। अब धान उगाना शुरू किया है।
प्रोसेसिंग यूनिट की सीएम से होगी सिफारिश : विधायक
बल्ह के विधायक इंद्र सिंह गांधी ने कहा कि सीएम जयराम ठाकुर के समक्ष यह मामला रखा गया है। बल्ह घाटी में टमाटर उत्पादकों के लिए एक प्रोसेस यूनिट लगाने की पैरवी करेंगे, जिससे टमाटर उत्पादन से जुड़ी किसानों की समस्या हल होगी। टमाटर की उचित कीमतें किसानों को मिल सकेंगी। सब्जी मंडी की खोलने का मुद्दा भी सरकार के समक्ष उठाया गया है।
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