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नप और ग्रामीणों पर मुकदमा, फिर भी नहीं सुलझा विवाद

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जोगिंद्रनगर (मंडी)। पहले नगर परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव और बाद में ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद भी जोगिंद्रनगर में डंपिंग साइट को लेकर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को शहर के कई कोनों से गंदगी तो उठाई गई, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते गंदगी डंपिंग साइट तक ले जाने वाली गाड़ियों के पहिए थमे रहे। गंदगी को तरपाल से ढक दिया गया है। अब यदि यह गाड़ियां खाली नहीं हुईं तो बुधवार को शहर में फिर से गंदगी नहीं उठ सकेगी। नगर परिषद जोगिंद्रनगर के कूड़े कचरे को ठिकाने लगाने की समस्या अभी भी समाप्त नहीं हुई है। मंगलवार को भी नगर परिषद के कर्मियों की ओर से एक टिपर और एक ट्रैक्टर ट्राली में कूड़ा भरा लेकिन, टिपर मेला ग्राउंड में और ट्रैक्टर रेलवे फाटक के समीप ही खड़ा रहा। हालांकि पुलिस ने लगभग दो दर्जन ग्रामीणों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया है। इसके बावजूद गांव वासियों के विरोध के चलते यह गाड़ियां डंपिंग साइट तक नहीं भेजी गईं। उधर, एसडीएम अमित मेहरा का कहना है कि प्रशासन विवाद सुलझाने के लिए प्रयासरत है।
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इंतजार करते रहे विरोध करने वाले
दूसरे दिन भी काफी संख्या में महिलाएं मच्छयाल में डंपिंग साइट को जाने वाले रास्ते में बैठी रहीं ताकि जोगिंद्रनगर से कूड़े की गाड़ियां जाने पर उन्हें डंपिंग साइट तक जाने से रोका जाए। लेकिन, नगर परिषद को इसकी भनक लगने पर गाड़ियों को जोगिंद्रनगर से ही नहीं भेजा गया।

कठिनाई में नगर परिषद
डंपिंग साइट में कूड़ा कचरा फेंकने का विरोध थमता नजर नहीं आ रहा तथा अगर इसका कोई स्थायी हल न निकाला गया तो आने वाले दिनों में नगर परिषद को और अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। एक तरफ जहां गांव वासी डंपिंग साइट पर कूड़ा कचरा कतई फेंकने नहीं देना चाहते वहीं नगर परिषद के पास फिलहाल कूड़ा कचरा ठिकाने लगाने का इस डंपिंग साइट के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में शहर वासियों को जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर से शीघ्र निजात मिलती नजर नहीं आती।
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