अमर उजाला ब्यूरो
धर्मपुर (मंडी)। पेयजल और सिंचाई की लिफ्टिंग के लिए लगे पंप और मोटरों की मरम्मत और खरीद के गड़बड़झाले की जांच की शुरुआत आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ने अपने ही गृह जिला से कर दी है। शनिवार को सुबह ही वह धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के बैंपड़ गांव में कांढापतन-ध्वाली पैरलल राइजिंग मेन के औचक निरीक्षण के लिए पहुंच गए। हालांकि, पिछले कार्यकाल में विधायक रहते उन्होंने इस योजना में अनियमितता को कई बार उठाया था लेकिन अब मंत्री बनने के बाद उन्होंने इसी योजना से आईपीएच विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। मौके पर ही तमाम अधिकारी भी बुलाए गए और पूछताछ के बाद बात सामने आई कि इस योजना के तहत नई मशीनरी को बिना विधिवत शुभारंभ के चला दिया गया है। कागजों में तो पुरानी मशीनरी से काम लिया जा रहा है, लेकिन यहां नई मशीनरी को ही चलाकर खराब कर दिया है। मुख्य पेयजल योजना के समानांतर इस योजना को शुरू किया गया था। नतीजन वहां पानी की किल्लत न हो, लेकिन निरीक्षण के दौरान मंत्री ने यहां बड़ी खामी पकड़ ली और त्वरित जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने मौके पर कहा कि यदि इसमें विभागीय अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही निकली तो पैसा अफसरों की पगार से कटेगा। वहीं, इस मशीनरी पर कितना पैसा खर्च हुआ है, इसका ब्योरा भी तलब किया है।
क्यों नहीं ली गई अनुमति
मौके पर पहुंचे आईपीएच मंत्री अफसर और कर्मचारियों पर भड़क गए। उन्होंने वहां पंप हाउस का निरीक्षण किया और पंप हाउस के बारे में विस्तृत जानकारी ली। जब अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि जिस स्कीम का अभी उद्घाटन नहीं हुआ है उसकी पंपिंग मशीन खराब हो गई है क्योंकि उसे बिना किसी अनुमति से चलाया जा रहा था। इस पर मंत्री बुरी तरह से उखड़ गए और जांच के आदेश जारी कर दिए। उन्होंने कहा कि जिस भी कर्मचारी या अधिकारी के कारण यह मशीनरी खराब हुई है, इसकी भरपाई संबंधित कर्मचारी या अधिकारी से की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस स्कीम को तुरंत ठीक किया जाये तथा जो लाइन बिछाने को रह गई है, उसे पूरा करें।
जांच में निकली कोताही तो होगी कार्रवाई
आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि नियमों को ताक पर रखकर किए गए कार्य बर्दाश्त नहीं होंगे। कोताही निकलने पर कार्रवाई होगी। कांढापतन-ध्वाली पैरलल राइजिंग मेन की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। यहां पुरानी मशीन कागजों में चल रही है, लेकिन काम नई मशीन से लिया गया है। इसे कागजों में चालू ही नहीं दर्शाया गया है। यदि यह स्कीम ठेके पर दी गई है तो इसकी भी जांच होगी। सरकार प्रदेश में जलसंग्रहण पर विशेष ध्यान देगी तथा इसके लिए ऐसी जगह तलाशी जाएगी, जहां यह जलसंग्रहण किया जा सकता है और इसका मास्टर प्लान बनाकर भारत सरकार को भेजा ही नहीं जाएगा बल्कि उसे पूरा करवाने के लिए केंद्र सरकार से बजट का प्रावधान भी किया जाएगा।