बालीचौकी (मंडी)। नई सरकार, नए स्वास्थ्य मंत्री लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं पुराने ढर्रे पर चल रही हैं। हमेशा स्वास्थ्य क्षेत्र में बदहाली को लेकर निशाने पर रही पुरानी सरकार बदल गई है लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में व्यवस्थाएं बिलकुल नहीं बदली हैं। रोगी दर्द से कराहते रहते हैं और अस्पताल में डॉक्टर फोन करने के बाद ही पहुंचते हैं। बात हो रही है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बालीचौकी की। यहां पर शनिवार को अस्पताल प्रबंधन की कोताही से एक स्कूली छात्र को इलाज के लिए करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। कुत्ते के काटने से घायल हुआ स्कूली छात्र एक घंटे तक दर्द मसे कराहता रहा लेकिन, अस्पताल प्रबंधन समय पर बच्चे को प्राथमिक उपचार नहीं दे सका। ऐसा नहीं है कि इस अस्पताल में डॉक्टर तैनात नहीं हैं लेकिन, शनिवार को जब स्कूली बच्चे को अस्पताल में प्राथमिक उपचार के लिए लाया गया तो डॉक्टर साहब ही अस्पताल नहीं पहुंचे थे। फोन करने के बाद जब डॉक्टर अस्पताल पहुंचे तो परिजनों को एंटी रैबिज का टीका भी बाहर से खरीदना पड़ा। मामले में सीएमओ मंडी ने जांच की बात कही है।
जानकारी के मुताबिक स्थानीय निजी स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ने वाले सुशांत को शनिवार सुबह स्कूल जाते वक्त कुत्ते ने काट दिया। इसके बाद परिजन सेवानिवृत्त कानूनगो मेघ सिंह ठाकुर ने बच्चे को पीएचसी में पहुंचाया। उस समय मात्र स्टाफ नर्स ही संस्थान में हाजिर थी। पीएचसी में डेपुटेशन पर कार्य कर रहे चिकित्सक को जब सूचना दी गई तो बाद में डॉक्टर अस्पताल पहुंचे।
बाहर से खरीदने पड़ा इंजेक्शन
बच्चे के साथ आई मां ने भी उपचार मिलने में देरी होने की विभागीय अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के प्रति लापरवाही पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि अस्पताल प्रबंधन की वजह से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एंटी रैबीज के टीका भी बाहर से खरीदना पड़ा। सीएमओ मंडी डॉ डीआर शर्मा ने कहा कि मामला ध्यान में है। जल्द मामले की जांच की जाएगी।