जोगिंद्रनगर (मंडी)। पटवारी एवं कानूनगो महासंघ के प्रांतीय प्रतिनिधि सतीश भाटिया ने मिनिस्ट्रियल स्टाफ की नायब तहसीलदार पदोन्नति में कानूनगो के 20 फीसदी कोटे को असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि कैडर स्ट्रेंथ के हिसाब से पटवारी-कानूनगो को लिपकीय वर्ग की तुलना में बेहद कम पदोन्नति के अवसर मिल रहे हैं।
सतीश भाटिया ने यहां जारी बयान में कहा कि एक पटवारी अधिकतम कानूनगो तक पदोन्नत होता है, जबकि लिपिक अधीक्षक ग्रेड-1 या तहसीलदार पद से सेवानिवृत्त होता है। इस विसंगति को देखते हुए सरकार ने महासंघ के अनुरोध पर एक कमेटी गठित की थी, जिसकी सिफारिशें सरकार को भेजी जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि यदि मिनिस्ट्रियल स्टाफ कानूनगो के 20 फीसदी पदोन्नति कोटे का दावा करता है, तो उसे अपने कोटे से अधीक्षक पद में भी 20 फीसदी कोटा कानूनगो के लिए देना होगा। अन्यथा, मिनिस्ट्रियल स्टाफ कुल 120 फीसदी पदोन्नति प्राप्त कर रहा है, जो पूरी तरह असंवैधानिक है।
महासंघ ने मांग की है कि या तो मिनिस्ट्रियल स्टाफ का 20 फीसदी कोटा समाप्त किया जाए या कानूनगो को भी अधीक्षक पद में समान पदोन्नति का अवसर दिया जाए। अन्यथा, महासंघ इस अन्याय के खिलाफ कदम उठाने को बाध्य होगा। महासंघ ने 900 पटवारी पदों को भरने के निर्णय का स्वागत करते हुए जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कई तहसीलों में पटवारियों पर दो-तीन पटवार वृतों का कार्यभार है, जबकि उन्हें लगातार नए कार्य सौंपे जा रहे हैं, जिन्हें समयबद्ध रूप से पूरा करना मुश्किल हो रहा है। रिक्त पदों के चलते प्रशासनिक कार्यों में बाधा आ रही है।