मंडी। सराजघाटी के हजार पहाड़ियों के राजा देव शैटीनाग अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के लिए शनिवार को अपने लाव लश्करों के साथ रवाना होंगे। देवता को शिवरात्रि में ले जाने के लिए इस बार निचली चेत के कारिंदों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। करीब 120 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर देव शैटीनाग चार मार्च सुबह मंडी पहुंचेंगे। देवता के गूर कर्म सिंह ठाकुर ने बताया कि देवता को निचली चेत से शिवरात्रि के लिए ले जाया जाएगा। उन्होंने बताया कि देवता के वर्तमान में चार बढ़ह हैं। चार बढ़ह का देवता होने के कारण हर वर्ष अलग-अलग बढ़ह के लोग देवता को शिवरात्रि के लिए ले जाते हैं। उन्होंने बताया देवता शैटीनाग जनपद के प्राचीनतम देवताओं में से एक हैं। मंडी शिवरात्रि मेले में माधवराय मंदिर परिसर में उनके साथ विराजते हैं।
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देवताओं को बल देते हैं शैटीनाग
देवता के कारदार हिम्मत राम ने बताया है कि देवता की उत्पत्ति के बारे में कोई लिखित प्रमाण नहीं हैं, लेकिन उत्पत्ति की अनेक किंवदंतियां हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार शैटीनाग देवता मूल रूप से अश्वनी कुमार हैं और देवताओं को बल प्रदान करते हैं। इसलिए महादेव ने इसी गुण के कारण शैटीनाग को हजार पहाड़ियों का राजा घोषित कर रखा है। माना जाता है कि देव-राक्षसों के युद्ध में जब देवता क्षीण होते थे तो तब वह अश्वनी कुमार के पास बल प्राप्त करने के लिए जाते थे।
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हंसकुंड से आए हैं शैटीनाग
एक अन्य कथा के अनुसार देवता हंसकुंड महाराज है और यह हंसकुड से आए हैं। हंसकुंड तीर्थन घाटी स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में एक पवित्र स्थान है। हालांकि इस बारे में सटीक तथ्य पेश नहीं हैं।
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40 दिनों तक श्रद्धालुओं के घरों में करेंगे मेहमाननवाजी
देवता के कारकारिंदों ने बताया है कि शिवरात्रि से लौटने के बाद 40 दिनों तक देवता पंडोह, गोहर, मौवीसेरी, स्यांज, धरोटधार के कई गांवों का भ्रमण करेंगे। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु देवता को अपने घरों में आने का न्योता देते हैं। क्षेत्र के देवलु मटर की बिजाई करके देवता के साथ शिवरात्रि के लिए निकलते हैं और 40 दिनों तक देवता के साथ रहते है।
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