थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा ने हजारों बच्चों की पढ़ाई को बुरी तरह से प्रभावित किया है। बच्चे दस दिनों से घरों में कैद हैं। आपदा ने न केवल बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाला है। क्षेत्र के 30 सीनियर सेकेंडरी स्कूल, 50 हाई स्कूल, 80 मिडिल स्कूल और करीब 100 आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हैं।
एक दर्जन निजी स्कूल भी खतरे की जद में हैं। देजी पखरैर पंचायत सहित एक दर्जन स्कूल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। लांबशाफड़, थुनाग, बहली, लंबाथाच, जरोल, बूंगरैलचौक और चिऊणी के स्कूल सबसे अधिक प्रभावित हैं। खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी सराज लाल सिंह ने बताया कि स्कूलों को हुए नुकसान और संभावित खतरों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
अभिभावक बिमला देवी, नैणा देवी, चेतना, गोकुल चंद, रोशन लाल, मीरा देवी, कन्हैया लाल और भारती देवी ने बताया कि मानसून ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ज्यादातर स्कूल पहाड़ी, तलहटियों या नालों के किनारे बने हैं। तीस से ज्यादा स्कूलों में मलबा घुस गया है। एक दर्जन स्कूल खतरे में हैं। सराज कॉलेज लंबाथाच में गाद भर गई है। आईटीआई बगस्याड़ में शरण नाले का पानी घुस गया है। हॉर्टिकल्चर थुनाग कॉलेज थुनाग, फार्मेसी कॉलेज के छात्र अपने घर लौट चुके हैं। बच्चों की किताबें, कॉपियां मलबे में बह गए हैं। पंजाई के समाजसेवी राकेश कुमार ने कहा कि बच्चों के लिए नोटबुक, स्कूल बैग, यूनिफॉर्म, स्कूल शू और खेलकूद का सामान दान किया जाए। सेवानिवृत्त शिक्षक नंद लाल ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को घर पर पढ़ाएं और गांव के सेवानिवृत्त शिक्षकों की मदद लें।
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बच्चों में डर, चिंता और सामाजिक अलगाव के लक्षण उभरने पर अस्थायी स्कूल और सामुदायिक गतिविधियां जैसे खेल और चित्रकला तनाव कम कर सकती हैं। अभिभावकों को बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए और उनकी भावनाओं को सुनना चाहिए। सामुदायिक सहयोग से मोबाइल लर्निंग सेंटर और पोषण शिविर शुरू किए जा सकते हैं।
-मीरा मंजुल, मनोचिकित्सक
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