दूसरी एवं मध्य जलेब का नेतृत्व सराज घाटी के देवता छांजणू-छमांहू ने किया। उनके पीछे प्राचीन परंपरा के अनुसार मार्कंडेय ऋषि, देव विष्णु मतलोडा, ऋषि पराशर, देवी अंबिका थट्टा डाहर, शैटी नाग, मगरु महादेव, देव बायला नारायण, चपलांदू नाग, देव बिठु नारायण, लक्ष्मी नारायण, देव हुरंग नारायण, देव पशाकोट, देव चुंजवाला, देव तुंगासी, देव गणपति, देव टुंडीवीर समेत अन्य देवी-देवताओं ने अपने-अपने देवलुओं के साथ भाग लिया। चौहारघाटी के देवताओं ने हुरंग नारायण की अगुवाई में शिरकत की।
मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने मुख्यातिथि का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि आयोजन समिति की ओर से देवी-देवताओं तथा उनके साथ पहुंचे देवलुओं की सुविधा के लिए सभी जरूरी प्रबंध किए हैं। इधर, सर्व देवता सेवा समिति के अध्यक्ष शिव पाल शर्मा ने बताया कि जलेब में देवी-देवताओं का क्रम रियासत काल से ही निर्धारित है। इस मौके पर विधायक चंद्रशेखर, पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी समेत अन्य नेता मौजूद रहे।