हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज में बारिश के दौरान बाढ़ का खतरा किन इलाकों में अधिक हो सकता है, इसका आकलन करने के लिए शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क (एएनएन) मॉडल की मदद ली है। पुराने बाढ़ रिकॉर्ड और क्षेत्र की भौगोलिक जानकारी के आधार पर किए गए अध्ययन में सराज के करीब 27 प्रतिशत क्षेत्र को हाई फ्लड सस्पेक्टिबिलिटी जोन में पाया गया है। यानी इस हिस्से की भौगोलिक परिस्थितियां बाढ़ के लिहाज से अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील हैं। यह शोध माधवी ठाकुर, अंकित सिंह, राज जम्वाल, भावना पाठक और अंशुल सूद ने आईआईटी मंडी के प्रो. डेरिक्स पी. शुक्ला के नेतृत्व में किया है। शोधकर्ताओं ने जुलाई 2026 में तिरुवनंतपुरम में आयोजित मशीन इंटेलिजेंस फॉर जियोएनालिटिक्स एंड रिमोट सेंसिंग अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सराज क्षेत्र में बाढ़ संवेदनशीलता से संबंधित यह शोध प्रस्तुत किया।
शोध में 222 स्थानों को आधार बनाया गया। इनमें 111 ऐसे स्थान शामिल थे, जहां पहले बाढ़ आ चुकी थी, जबकि 111 स्थान गैर-बाढ़ प्रभावित थे। मॉडल ने दोनों तरह के स्थानों के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह पैटर्न समझा कि किन भौगोलिक परिस्थितियों में बाढ़ के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है। शोध में वर्ष 2021 से 2025 तक के बाढ़ संबंधी आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा एसडीएम कार्यालय, थुनाग से वर्ष 2025 में हुए नुकसान से संबंधित जानकारी भी ली गई। शोधकर्ताओं ने क्षेत्र की ढलान, ढलान की दिशा, ऊंचाई, नदी से दूरी, जमीन में पानी ठहरने की स्थिति (टीडब्ल्यूआई), जमीन की ऊबड़-खाबड़ स्थिति (टीआरआई) और जमीन की बनावट (कर्वेचर) जैसे कारकों को अध्ययन में शामिल किया। इन्हीं जानकारियों के आधार पर एएनएन मॉडल को प्रशिक्षित किया गया।