विनाशकारी बारिश और भूस्खलन ने जहां सराज के परवाड़ा गांव में कई जिंदगियां लील लीं, वहीं उसी मलबे से एक जीवन, एक उम्मीद और एक भविष्य ने फिर जन्म लिया। यह कहानी है 11 महीने की नितिका की, जिसने आंखों के सामने अपने माता-पिता और दादी को खो दिया, लेकिन खुद चमत्कारी ढंग से बच निकली। भारी तबाही के बीच मासूम नितिका को मलबे से सही-सलामत निकालना किसी चमत्कार से कम नहीं था। यही कारण है कि आज जिला प्रशासन से लेकर आम लोग तक, सभी उसे 'उम्मीद की बच्ची' कहने लगे हैं।
नितिका को अनाथ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि अब पूरा जिला, पूरा प्रदेश और देश उसका परिवार बनता जा रहा है। जिला प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए नितिका के नाम पर दो बैंक खाते खोले हैं, जिनमें न केवल स्थानीय लोग बल्कि देशभर से लोग दिल खोलकर दान कर रहे हैं। इन खातों में आने वाली राशि से नितिका के नाम पर एक फिक्स्ड डिपॉजिट बनाई जाएगी, जो उसके 18 वर्ष पूरे होने तक सुरक्षित रहेगी।
बल्ह की एसडीएम स्मृतिका नेगी जब आपदा प्रभावित स्थल पर पहुंचीं तो मलबे के बीच एक मासूम बच्ची को देख उनका दिल भर आया। उन्होंने बच्ची को गोद में उठाया और कहा यह कोई साधारण बच्ची नहीं ये एक सुपर गर्ल है। उनकी पहल पर ही खाता खोला गया और लोगों से नितिका के लिए मदद की अपील की गई। कई अधिकारियों ने खुद दान किया और अब तक सैकड़ों लोग मदद के लिए आगे आ चुके हैं।