हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष वीरभद्र सिंह के मुख्यमंत्री पद की दावेदारी का पार्टी के भीतर ही विरोध होने लगा है। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक केंद्रीय वाणिज्य मंत्री और हिमाचल के दिगग्गज कांग्रेसी नेता आनंद शर्मा वीरभद्र सिंह को मुख्यमंत्री बनाए जाने के खिलाफ हैं।
पार्टी के भीतर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ठाकुर कौल सिंह और आशा कुमारी के नेतृत्व में जीत कर आए 20 विधायकों का एक गुट भी वीरभद्र के खिलाफ सक्रिय हो गया है।
गौरतलब है कि ठाकुर कौल सिंह को ही हटाकर वीरभद्र सिंह को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।
इस गुट का कहना है कि वीरभद्र सिंह के पास केवल 16 विधायकों का ही समर्थन है। उन्होंने कहा कि वीरभद्र में जिन उम्मीदवार को खुद कहकर टिकट दिलाया था, उनमें से अधिकांश चुनाव हार गए हैं।
वीरभद्र से नाराज गुट का ये भी कहना है कि उन्होंने जिन-जिन सीटों पर कांग्रेस का प्रचार किया, उनमें से अधिकांश पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
नाराज गुट ने कहा है कि वे इन तथ्यों का पार्टी आलाकमान के सामने उठाएंगे और वीरभद्र को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध करेंगे।
वहीं, गुरुवार को चुनाव रुझानों के बाद वीरभद्र सिंह ने कहा था कि मुझे पार्टी को सत्ता में लाने का काम सौंपा गया था, जिसे मैने पूरा कर दिया। अब हमारी राष्ट्रीय नेता (सोनिया गांधी) को तय करना है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा।
इसके साथ ही वह यह भी कहने से नहीं चूके कि कांग्रेस हाईकमान किसी बाहरी व्यक्ति को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगा।
वीरभद्र सिंह चुनाव प्रचार के समय कांग्रेस द्वारा घोषित मुख्यमंत्री पद के दावेदार भले ही न रहे हों, लेकिन पूरा चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा व जीता गया है।