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Kullu News: महिलाएं बखूबी निभा रहीं लालड़ी नृत्य की परंपरा

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कुल्लू। जिले की परंपराओं में महिलाओं को विशेष स्थान दिया जाता है। कुछ परंपराएं कुल्लू में ऐसी हैं, जिनका निर्वहन सिर्फ महिलाएं ही करती हैं। ऐसी ही एक परंपरा का आजकल घाटी की महिलाएं हर गांवों में निर्वहन कर रही हैं। महिलाएं लालड़ी नृत्य कर इनमें गाए जाने वाले गीतों के माध्यम से अपनी खुशी और दुख को व्यक्त करती हैं। लालड़ी नृत्य कुल्लू में महिलाओं को समर्पित है। खास बात यह है कि आधुनिकता के इस दौर में जहां हम पुरानी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। कुल्लू में महिलाओं ने सदियों पुरानी इस परंपरा को जीवंत रखा हुआ है। लालड़ी सिर्फ एक नृत्य नहीं बल्कि महिलाओं के प्रति एक सम्मान है। बैसाख संक्रांति के बाद जिले के अधिकतर देवी-देवता अपने देवालयों से बाहर निकले हैं। देवताओं के पास बिरशू मेले आयोजित हो रहे हैं। इन मेलों में गांव की महिलाएं, बेटियां पारंपरिक परिधान पट्टू, धाठू में सजकर लालड़ी नृत्य कर रही हैं। महिलाओं के चेहरों पर लालड़ी को लेकर एक अलग ही खुशी होती है। यह वही मौका होता है जब उन्हें सम्मान मिलता है।
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महिलाओं को लालड़ी नृत्य का बेसब्री से इंतजार रहता है। पट्टू और धाठू में सजकर महिलाएं गीतों के माध्यम से भाव व्यक्त करती हैं। चैत्र और बैसाख के महीने में कुल्लू के गांवों में लालड़ी में महिलाओं की लगभग 100 फीसदी भागीदारी होती है।
-राधा देवी, खराहल


कुल्लू की संस्कृति समृद्ध है। कुछ पर्व और परंपराएं महिलाओं को समर्पित है। लालड़ी नृत्य के माध्यम से जहां महिलाओं को सम्मान मिलता है, वहीं महिलाएं इसके माध्यम से सशक्तीकरण का भी संदेश देती हैं।
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प्रेम लता शर्मा, गुशैणी, कुल्लू
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