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Kullu News: चेहरों पर खुशियों के रंग भर गई सफेद चांदी

Wed, 28 Jan 2026 10:48 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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मनाली में हुई ताजा बर्फबारी से ढकी सड़क।-संवाद
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जिले की सेब बेल्ट पर जमी बर्फ की परत से चिलिंग ऑवर्स पूरे होने की उम्मीद
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नमी से गुठलीदार फलों में समय से पहले फूल आने का खतरा भी हो गया कम

बलदेव राज
कुल्लू। जिले की सेब बेल्ट पर जमी बर्फ की सफेद चादर ने बागवानों के चेहरों पर फिर से रौनक लौटा दी है। साल की दूसरी बर्फबारी ने न सिर्फ सेब के चिलिंग ऑवर्स पूरे होने की उम्मीद जगाई है, बल्कि गुठलीदार फलों में समय से पहले फूल आने के खतरे को भी काफी हद तक कम कर दिया है।
बर्फ से ग्रामीण इलाकों में सेब के बगीचे लकदक हैं। सेब के चिलिंग ऑवर्स भी पूरे होंगे। पौधों में नमी होने से गुठलीदार फलों में जल्द फूल आने की संभावना भी अब कम हो गई है।
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गौर रहे कि सेब की अर्ली वैरायटी के लिए 600 घंटों का चिलिंग ऑवर्स पूरा होना जरूरी रहता है। साथ ही रॉयल वैरायटी के लिए चिलिंग ऑवर्स 1200-1600 घंटों का रहता है। रात के समय तापमान माइनस में पहुंच रहा है। बर्फबारी के बाद चिलिंग ऑवर्स में तेजी से इजाफा होगा। विभाग के अनुसार मार्च तक सेब के लिए जरूरी चिलिंग ऑवर्स लगभग पूरे हो जाएंगे। सेब के चिलिंग ऑवर्स पूरे होने की उम्मीद से बागवानों को भी बेहतर फसल की होने की आस जगी है। चार माह तक सूखे जैसे हालात के बीच बागवानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंच गई थीं। सेब बेल्ट में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है। बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी है। ऐसे में गुठलीदार फल आड़ू, बादाम, और प्लम में जल्दी फूल आने की संभावना भी कम हो गई है जबकि सूखे जैसे हालात के बीच अर्ली फ्लावरिंग की संभावना बनी हुई थी। बहरहाल बागवानों के चेहरों पर बर्फबारी ने रौनक लाई है।


बागवानी से जुड़ी है कुल्लू की 80 फीसदी आबादी
कुल्लू जिले में करीब 30000 हेक्टेयर से अधिक भूमि में बागवानी हो रही है। इसमें 27000 से अधिक हेक्टेयर भूमि पर सेब का उत्पादन हो रहा है। साथ ही प्लम, जापानी फल के साथ नाशपाती की भी पैदावार होती है। बागवानी से जिले की करीब 80 फीसदी आबादी जुड़ी है। सीजन के दौरान सैकड़ों प्रवासी मजदूरों को भी रोजगार मिलता है।
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जनवरी के अंतिम पखवाड़े में दो बार हुई बर्फबारी बागवानी के लिए फायदेमंद है। बर्फबारी-बारिश से सेब के लिए चिलिंग ऑवर्स पूरे होंगे। इससे अच्छी फसल की उम्मीद की जा सकती है। बगीचों में पर्याप्त नमी होने से गुठलीदार फलों में अर्ली फ्लावरिंग की संभावना अब कम हो गई है। - राजकुमार, बागवानी विभाग उप निदेशक कुल्लू
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