बारिश के बाद दोगुना हो गई सेब, प्लम और जापानी फल के पौधों की मांग
प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड से आने लगे ऑर्डर
बाहर जाते हैं लाखों पौधे, नर्सरियों में हर साल होता है करोड़ों का कारोबार
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बारिश के बाद जिले की नर्सरियों में तैयार सेब, प्लम और जापानी फल सहित अन्य पौधों की मांग दोगुना हो गई है। नर्सरियों में पौधों के कारोबार में तेजी आई है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड जैसे राज्याें से ऑर्डर आना शुरू हो गए हैं। नर्सरियों में हर साल करोड़ों का कारोबार होता है। सेब, प्लम, जापानी फल और अनार के लाखों पौधे जिले से बाहर जाते हैं।
गौर रहे कि जिले में करीब 250 नर्सरियां पंजीकृत हैं। कई बागवानों ने अपने बगीचों में भी नर्सरियां लगाई हैं। नर्सरियों में लाखों की संख्या में पौधे हैं। बारिश के बाद ये पौधे तेजी से निकलना शुरू हो गए हैं। हालांकि जनवरी के तीन सप्ताह तक नर्सरियों का 30 फीसदी स्टॉक ही समाप्त हुआ था। पौधों के लिए गड्ढे बनाने के साथ बागवानों ने बगीचों में अब नए पौधे लगाने का क्रम भी शुरू कर दिया है। हालांकि बागवानी विभाग ने बागवानों से अपील की है कि वे पंजीकृत नर्सरियों से सेब, प्लम और जापानी फल के पौधे खरीदें। जिले में हर साल नर्सरियाें में सेब पौधों का करोड़ों का कारोबार होता है। कुल्लू जिले में रायसन से लेकर बजौरा तक नर्सरियां हैं। इनमें लाखों सेब, जापानी फल, प्लम के पौधे तैयार हैं। खास बात यह है कुल्लू की आबोहवा में तैयार होने वाले पौधों की अधिक मांग रहती है। गुणवत्ता में बेहतर होने के साथ ही इनके बेहतर परिणाम आते हैं। कुल्लू में नर्सरी संचालक कुलदीप ने कहा कि बारिश के बाद पौधों की डिमांड दोगुना बढ़ गई है।
बारिश व बफबारी के बाद बगीचों में नए पौधे लगाने के लिए बागवानों ने गड्ढे बनाने का क्रम शुरू कर दिया है। इसके साथ ही बागवान नए पौधे भी लगा रहे हैं। बागवान अपने बगीचों में अच्छी गुणवता के सेब पौधे ही लगाएं।
लाल चंद ठाकुर, अध्यक्ष, फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन कुल्लू।