साफ पानी मुहैया करवाने के लिए कुल्लू जिला प्रशासन और सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है। कुल्लू के कुछ हिस्सों में लोग पीलिया की चपेट में आने के बावजूद आइपीएच विभाग और प्रशासन की ओर से इससे निपटने के लिए कोई खास प्रबंधन नहीं किए हैं। यहां तक कि जिला मुख्यालय कुल्लू में ही सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार 1982 से मलिन बस्ती में आईपीएच विभाग की पेयजल टंकी सूखी पड़ी हुई है, वहीं विभाग को इसकी जानकारी की नहीं है। जिसके चलते लोगों को दरिया का मटमैला पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। ब्यास नदी का पानी पहले ही पीने लायक नहीं बचा है। इसका प्रमाण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए पानी के सैंपल की जांच द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि ब्यास नदी का पानी पीना तो दूर नहाने लायक भी नहीं बचा है, लेकिन जिला मुख्यालय कुल्लू में आईपीएच विभाग के आंगन में बसी मलिन कालोनी के लोग ब्यास नदी के मटमैले पानी पीने को मजबूर हैं। ऐसे में इस बस्ती के लोगों में जलजनित रोग फैलने का अंदेशा बना हुआ है।
मलिन बस्ती के मुकेश, मुनी और रीना आदि का कहना है कि उन्हें मजबूरन ब्यास नदी का गंदा पानी पीना पड़ रहा है। विभाग को कई बार यहां नल स्थापित करने की मांग की जा चुकी है परंतु अभी तक विभाग ने यहां नल स्थापित नहीं किए हैं। इस बस्ती में ढाई से तीन सौ की आबादी रहती है। जिन्हें मटमैला पानी पीना पड़ रहा है।
इधर, आईपीएच विभाग के एसडीओ सेस राम आजाद का कहना है कि क्षेत्र में लोगों की डिमांड पर नल लगाए जाएंगे जिससे उन्हें पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध हो सके। इधर, नगर परिषद कुल्लू के नव निर्वाचित उपाध्यक्ष गोपाल कृष्ण महंत ने बताया कि लोगों की तमाम समस्याओं का निपटारा करने का पूरे प्रयास किए जाएंगे। इस बस्ती में पेयजल पानी की गंभीर समस्या है।