संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर नियमों को ताक पर रखकर खटारा बसें दौड़ रही हैं। इनका निरीक्षण एचआरटीसी व परिवहन विभाग के अधिकारियों की ओर से कई सालों से नहीं किया है। इससे मुसाफिरों की जान खतरे में डाली जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों के रूटों में पथ परिवहन निगम की 42 सीटर बस में 70 से 80 सवारियां ठूंस-ठूंसकर भरी जा रही है। रूट पर बसों की संख्या कम होने से यात्री भी जान जोखिम में डालकर बसों में सफर कर घर पहुंचने को मजबूर हैं। जिला कुल्लू के बंजार, गुशैणी, गाड़ागुशैणी, पलाईच, खराहल, लगवैली, पीज, कालन, बेखली, व्यासर, मणिकर्ण घाटी, बरशैणी समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में पथ परिवहन निगम की खटारों बसों का निरीक्षण नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि समय-समय पर एचआरटीसी के अधिकारियों को अवगत करवाया गया है, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी एचआरटीसी प्रबंधन नहीं जाग रहा है। इससे लगातार हादसे का खतरा बना रहता है। इन क्षेत्रों में दौड़ रही बसों में क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाई जा रहीं है। बस हादसा होने पर नियमों की बातें की जाती हैं। इसके बाद इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। कुछ ग्रामीण रूटों पर कंडम बसें भी चल रही हैं। ग्रामीण यशवंत शर्मा, सुरेश, केहर सिंह, शेर सिंह, भीमसेन, तारा चंद, योगराज, तारा देवी, हेमलता, सीता देवी समेत अन्य ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में खटारा बस दौड़ रही हैं। इनमें ठूस-ठूस कर सवारियां भरी जा रही है। बसें सवारियों के साथ बीच सड़क में खराब हो रही हैं।
टिकट की चेकिंग पर ध्यान, ओवरलोड पर नहीं
पथ परिवहन निगम की बसों में एचआरटीसी के अधिकारी समय-समय पर सवारियों के टिकट की चेकिंग करते हैं, लेकिन बस में कितनी सवारियां भरी गई हैं, इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। इस पर एचआरटीसी प्रबंधन भी सख्त नहीं दिखाई दिया है। पथ परिवहन निगम कुल्लू के क्षेत्रीय प्रबंधक डीके नारंग ने बताया कि अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में निरीक्षण के लिए भेजा जाता है। लोगों की सुरक्षा को लेकर एचआरटीसी गंभीर है।
पुरानी बसों का मामला ध्यान में नहीं : हेमचंद
परिवहन विभाग कुल्लू के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी हेमचंद वर्मा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही एचआरटीसी की पुरानी बसों का मामला ध्यान में नहीं है। अगर ऐसा है तो पथ परिवहन निगम प्रबंधन को निर्देश दिए जाएंगे कि ग्रामीण क्षेत्रों में नई बसों को चलाया जाए। समय-समय पर बसों का निरीक्षण किया जा रहा है। बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के बस नहीं चल सकती है। ओवरलोडिंग को लेकर परिवहन विभाग सख्ती से पेश आएगा। लापरवाह चालकों-परिचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।