लाहौल में बर्फबारी के बाद बर्फ से ढके सेब के पेड़।
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लाहौल घाटी में हुई बेमौसम बर्फबारी ने बागवानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। सेब के फलों से लदे पेड़ों पर भारी बर्फ जमने से कई जगह टहनियां टूट गईं और पेड़ भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। टूटकर गिरी डालियों के साथ तैयार सेब जमीन पर बिखर गए। पर्यटन कारोबार के लिए राहत लेकर आई बर्फबारी से जहां घाटी में सर्दियों की गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, वहीं बागवानों की आर्थिकी पर इसका प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, बगीचों में लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है।
पट्टन घाटी में हाल ही में सेब तुड़ान का काम शुरू हुआ था। इस बार अच्छी पैदावार के चलते पेड़ फलों से लदे हुए थे। ऐसे में अचानक हुई बर्फबारी के बाद पेड़ों पर जमा बर्फ का भार टहनियां टूटने की वजह बना। कड़ाके की ठंड के बीच बागवान लाठियों की मदद से पेड़ों पर जमी बर्फ हटाकर फसल बचाने में जुटे रहे। हालांकि, कई बगीचों में तब तक नुकसान हो चुका था।
1,150 हेक्टेयर में फैले बगीचे, करोड़ों की फसल पर संकट
लाहौल घाटी में करीब 1,150 हेक्टेयर भूमि पर सेब के बगीचे फैले हैं। यहां से हर साल लगभग 3,000 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाले सेब देश की प्रमुख मंडियों में भेजे जाते हैं। घाटी में मुख्य रूप से रॉयल, गाला, स्पर, हेपके और रेड वन किस्मों के सेब का उत्पादन होता है। इस समय बड़ी मात्रा में सेब की फसल पेड़ों पर मौजूद है और तुड़ान का काम शुरुआती चरण में है। ऐसे में बेमौसम बर्फबारी से न केवल तैयार फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है, बल्कि बागवानों की आमदनी भी प्रभावित हो सकती है। नुकसान की वास्तविक मात्रा का पता विस्तृत आकलन के बाद ही चल सकेगा।