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हिमाचल: लाहौल घाटी में बेमौसम बर्फबारी ने बागवानों की मेहनत पर फेरा पानी, सेब के बगीचों को लाखों का नुकसान!

Fri, 16 Oct 2026 10:30 AM IST
Ankesh Dogra अशोक राणा, केलांग (लाहौल-स्पीति)।

सार

लाहौल-स्पीति की पट्टन घाटी में बेमौसम बर्फबारी ने सेब बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। फलों से लदे पेड़ों पर बर्फ जमने से टहनियां टूट गईं और तैयार सेब जमीन पर गिर गए। शुरुआती अनुमान में लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है, जबकि वास्तविक स्थिति फील्ड रिपोर्ट मिलने के बाद स्पष्ट होगी।
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लाहौल में बर्फबारी के बाद बर्फ से ढके सेब के पेड़। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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लाहौल घाटी में हुई बेमौसम बर्फबारी ने बागवानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। सेब के फलों से लदे पेड़ों पर भारी बर्फ जमने से कई जगह टहनियां टूट गईं और पेड़ भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। टूटकर गिरी डालियों के साथ तैयार सेब जमीन पर बिखर गए। पर्यटन कारोबार के लिए राहत लेकर आई बर्फबारी से जहां घाटी में सर्दियों की गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, वहीं बागवानों की आर्थिकी पर इसका प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, बगीचों में लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है।

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पट्टन घाटी में हाल ही में सेब तुड़ान का काम शुरू हुआ था। इस बार अच्छी पैदावार के चलते पेड़ फलों से लदे हुए थे। ऐसे में अचानक हुई बर्फबारी के बाद पेड़ों पर जमा बर्फ का भार टहनियां टूटने की वजह बना। कड़ाके की ठंड के बीच बागवान लाठियों की मदद से पेड़ों पर जमी बर्फ हटाकर फसल बचाने में जुटे रहे। हालांकि, कई बगीचों में तब तक नुकसान हो चुका था।

1,150 हेक्टेयर में फैले बगीचे, करोड़ों की फसल पर संकट
लाहौल घाटी में करीब 1,150 हेक्टेयर भूमि पर सेब के बगीचे फैले हैं। यहां से हर साल लगभग 3,000 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाले सेब देश की प्रमुख मंडियों में भेजे जाते हैं। घाटी में मुख्य रूप से रॉयल, गाला, स्पर, हेपके और रेड वन किस्मों के सेब का उत्पादन होता है। इस समय बड़ी मात्रा में सेब की फसल पेड़ों पर मौजूद है और तुड़ान का काम शुरुआती चरण में है। ऐसे में बेमौसम बर्फबारी से न केवल तैयार फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है, बल्कि बागवानों की आमदनी भी प्रभावित हो सकती है। नुकसान की वास्तविक मात्रा का पता विस्तृत आकलन के बाद ही चल सकेगा।

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बेहतर दाम की उम्मीदों को लगा झटका
बागवान प्रीतम सिंह के मुताबिक, पट्टन क्षेत्र में सेब की तुड़ान अभी शुरू ही हुई थी। उस समय 20 किलोग्राम की पेटी के करीब 1,550 रुपये मिल रहे थे। अच्छी पैदावार के बीच बर्फबारी से हुआ नुकसान बागवानों के लिए बड़ा झटका है। एक अन्य बागवान सुरेश ताकी ने बताया कि शिमला और कुल्लू में फसल कमजोर रहने के कारण इस बार बड़े व्यापारियों ने लाहौल का रुख किया था। स्थानीय बागवानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सीजन के बीच हुई बर्फबारी ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है।

नुकसान के आकलन के लिए मांगी गई फील्ड रिपोर्ट
बागवानी विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों से फील्ड रिपोर्ट मांगी है। बागवानी अधिकारी डॉ. सुशेन के अनुसार, प्रसार अधिकारियों की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही बगीचों और फसल को हुए वास्तविक नुकसान की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल बागवानों की नजर नुकसान के आकलन पर है। यदि बड़े पैमाने पर फसल और पेड़ों को क्षति की पुष्टि होती है, तो इसका असर इस सीजन में उनकी कमाई पर पड़ सकता है।
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