बरसात और भूस्खलन से हाईवे-305 सहित मुख्य सड़कें बंद, सेब मंडियों तक पहुंचाना हुआ मुश्किल
बागवान बोले- सड़कें ठीक नहीं हुईं तो पूरा सीजन खराब हो जाएगा
विभाग ने मशीनरी तैनात की लेकिन लगातार बारिश ने काम रोक दिया
रोशन ठाकुर
कुल्लू। जिले की सैंज-बंजार घाटी के बागवानों की मेहनत बरसात और टूटी सड़कों की मार झेल रही है। हाईवे-305 समेत मुख्य संपर्क मार्ग बंद होने से करोड़ों रुपये की सेब की फसल बगीचों में फंसी रह गई है।
बारिश और भूस्खलन ने रास्तों को अवरुद्ध कर दिया है। इससे किसान तुड़ान नहीं कर पा रहे हैं। मंडियों तक फसल पहुंचाना सपना बन गया है। बागवानों की चिंता बढ़ रही है कि यह खराब मौसम और टूटी सड़कें उनकी खुशहाली पर करारी चोट साबित होंगी जबकि प्रशासन की ओर से इस संकट से निपटने के लिए अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
एपीएमसी के चेयरमैन के क्षेत्र की सड़काें की दशा भी दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। बंजार घाटी के हजारों बागवानों का सेब औट-बंजार-सैंज हाईवे-305 से आता है। स्थानीय मंडियों के साथ देश की मंडियों सेब ले जाने के लिए बागवानों को इसी हाईवे-305 से गुजरना होता है। हाईवे सैंज से खनाग, सोझा से लारजी तक खस्ताहाल है। कई जगह दरारें आने से मार्ग टूटने का खतरा है। हाईवे पर हर 50 से 100 मीटर की दूरी पर भूस्खलन हुआ है। इसमें दिन या रात में सफर करना खतरे से खाली नहीं है। एक माह से हाईवे महज छोटे वाहनों के लिए ही खुला है। वह भी रोज कई घंटे बंद रहता है।
जिभी से गाड़ागुशैणी, बंजार से गुशैणी-बठाहड़, लारजी से सैंज-न्यूली, बंजार से चेत्थर सहित बंजार की 31 सड़कें बंद हैं। बागवान निहाल भंडारी, राजेंद्र प्रकाश, दुनी चंद, हीरा लाल, कृष्ण ठाकुर ने कहा कि उन्हें डर लग रहा है कि सेब का तुड़ान कर दिया तो सड़क पर कहीं फंस न जाए।
सैंज घाटी के बगीचों में सेब तैयार है। सड़कें साथ नहीं दे रही हैं। कई सड़कें जून से बंद हैं। मुख्य सड़क न्यूली-सैंज-लारजी भी बार-बार अवरुद्ध हो रही है। बागवान जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। - सोहन ठाकुर
हाईवे-305 जगह-जगह टूटा है। बंजार-गुशैणी-बठाहड़ सड़क की हालत भी बदतर है। बागवान सेब का तुड़ान कर दें तो मंडियों तक कैसे पहुंचाएंगे। मंडियों में सेब के दाम भी उचित नहीं मिल रहे हैं। - आदर्श शर्मा
सेब सीजन के लिए सड़कों को बहाल करने के लिए जगह-जगह मशीनरी की तैनाती की गई है। लगातार बारिश होने से सड़कों को खोलना लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई के चुनौती बन गया है। सरकार बागवानों के साथ है। - राम सिंह मियां, अध्यक्ष एपीएमसी, कुल्लू-लाहौल