कुल्लू के लरांकेलो में काहिका उत्सव के दौरान विराजमान घाटी के देवी-देवता।
नग्गर/पतलीकूहल (कुल्लू)। ऊझी घाटी के लरांकेलो में रविवार को सैकड़ों श्रद्धालु दैवीय शक्ति के साक्षी बने। देवता लराईं महादेव के सम्मान में मनाए गए काहिका उत्सव में मूर्छित नड़ दैवीय शक्ति से सचेत हो उठा। इसके बाद देवता की जय-जयकार हुई। काहिका उत्सव में सात अन्य देवी-देवता भी शामिल हुए। हुल्की पर वाद्ययंत्रों की थाप पर देवी-देवताओं के देवरथों के साथ देवलु भी खूब थिरके। काहिका उत्सव में वाद्ययंत्रों की थाप पर हुई हुल्की सबके आकर्षण का केंद्र रही।
काहिका का आगाज दो दिन पहले हो गया था। लरांकेलो में देवताओं के आने का सिलसिला शनिवार तक जारी रहा। देवता विष्णु दवाड़ा, खंडासनी माता सरसई, देवता गणपति घुड़दौड़, माता चामुंडा सरसेई, माता काली ओड़ी अरछंडी और देवता वीर नाथ अपने देवलुओं के साथ काहिका उत्सव में शामिल हुए। रविवार को नड़ को देव कारकूनों ने देवविधि से मूर्छित करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद नड़ मूर्छित हुआ। उसके बाद देवता के आशीर्वाद से नड़ सचेत हुआ। देर शाम तक यहां पर देव परंपरा निभाने का सिलसिला जारी रहा। देवता लराईं महादेव का काहिका उत्सव तीसरे साल मनाया जाता है। काहिका में देव परंपराओं का निर्वहन किया गया। देवता लराईं महादेव के कारदार अर्जुन ने कहा कि तीन साल बाद मनाए जाने वाले काहिका उत्सव में नरमेध यज्ञ किया जाता है जो विश्व कल्याण के लिए होता है। काहिका उत्सव में आए हुए श्रद्धालुओं ने देवता लराईं महादेव और अन्य देवताओं के समक्ष शीश नवाकर आशीर्वाद लिया है। वहीं पंचायत के उप प्रधान ऋषि किशोर ने कहा कि मेले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ खेलकूद प्रतियोगिताएं भी करवाई जा रही हैं।