अभियोजन आरोप साबित करने में रहा नाकाम
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। पार्वती घाटी के शंगना पुल के पास नौ कट्टों में 262 किलो नागछत्री ले जाने के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुल्लू की अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने बरामदगी के कट्टों पर सील और प्राथमिकी संख्या न मिलने सहित जांच में कई खामियां पाईं।
मामला 16 अक्तूबर 2014 का है। पुलिस के अनुसार शंगना पुल के पास एक वाहन को रोककर तलाशी ली गई थी। वाहन से नौ कट्टों में 262 किलो नागछत्री बरामद हुई थी। वन विभाग के अधिकारी ने इसकी पहचान नागछत्री के रूप में की थी। पुलिस ने इसे बरशैणी जंगल से अवैध रूप से निकालकर ले जाने का मामला मानते हुए दो लोगों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था।
वीरवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पेश किए गए कट्टों पर न तो सील थी और न ही प्राथमिकी संख्या व पुलिस थाने का नाम अंकित था। इससे बरामद सामान के साथ छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। नमूने को रखने के तरीके को लेकर भी गवाह के बयान में विरोधाभास मिला। इसके अलावा, घटनास्थल के पास आबादी और व्यस्त सड़क होने के बावजूद जांच अधिकारी ने किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया।
अदालत में वन विभाग की ओर से ऐसा ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे साबित हो कि नागछत्री बरशैणी जंगल से निकाली गई थी या वह वन विभाग की संपत्ति थी। इन कमियों के आधार पर अदालत ने दो लेागों को आरोपों से बरी कर दिया।