4.5 मेगावाट की एक मात्र थिरोट परियोजना हांफ गई है। लाहौल घाटी में हर तरफ व्यवस्थाओं का आलम है। अब थिरोट परियोजना के हालातों पर अधिकारी और कर्मचारी सिविल एंड मेंटेनेंस सब डिवीजन कार्यालय का यहां से शिफ्ट होने का रोना रो रहे हैं। यहां के प्रशासन तथा सरकार के नेताओं को टुअर से फुर्सत नहीं रहती है। शुरू से ही लड़खड़ाती थिरोट परियोजना के हालातों से सब वाकिफ हैं।
इसी बीच परियोजना की टरबाइनें लड़खड़ा जाने से घाटीवासी बिजली को लेकर चिंता में हैं। समय रहते परियोजना के खराब टरबाइनों को दुरुस्त नहीं किया गया तो लाहौल घाटी लंबे समय तक घुप अंधेरे में डूब जाएगी। अधिक बर्फबारी होने की सूरत में कुल्लू से इस बीच सप्लाई की जा रही बिजली भी गुल हो जाएगी। लाहौल में थिरोट परियोजना के लिए वर्ष 2011 तक सिविल एंड मेंटेनेंस सब डिवीजन का कार्यालय था, जिसमें एक सहायक अभियंता, तीन कनिष्ठ अभियंता के अलावा अन्य स्टाफ के अधिकारी और कर्मचारी तैनात थे। लेकिन 18 जून 2011 को सिविल एंड मेंटेनेंस सब डिवीजन का पूरा स्टाफ लारजी पॉवर हाउस सब डिवीजन थलौट में शिफ्ट कर दिया गया है। इससे भी परियोजना का सही रखरखाव नहीं हो पा रहा है।
तांदी पंचायत प्रधान सुरेश कुमार ने कहा कि बोर्ड को थिरोट परियोजना की टरबाइनों को चकाचक करने के लिए बिजली बोर्ड के तकनीशियन स्टाफ को भेजा जाना चाहिए। उधर, एक्सईएन केलांग जीवन सिंह ठाकुर ने बताया कि 18 जून 2011 तक सिविल एंड मेंटेनेंस सब डिवीजन का पूरा स्टाफ यहां था। अब स्टाफ को लारजी पावर हाउस डिवीजन थलौट के लिए शिफ्ट कर दिया गया है। विधायक रवि ठाकुर का कहना है कि थलौट शिफ्ट किए गए सिविल एंड मेंटेनेंस सब डिवीजन कार्यालय को पुन: लाहौल में स्थापित किए जाने को लेकर प्रदेश मुख्यमंत्री से सिफारिश करेंगे। उन्होंने कहा कि बोर्ड के उच्च अधिकारियों से बात कर जल्द टेक्निकल टीम को थिरोट परियोजना की टरबाइनों को हेलीकॉप्टर से भेजा जाएगा।