खराहल घाटी में बगीचे में तैयार सेब।
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कुल्लू। कोरोना की दूसरी लहर में बागवान प्रभावित हुए हैं। सीजन से पहले नाशपाती व सेब के बगीचे खरीदने के लिए व्यापारी बागवानों के घर-द्वार दस्तक देते थे। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के चलते व्यापारी नाशपाती व सेब के बगीचों का सौदा करने नहीं पहुंचे हैं। इससे पहले सीजन से एक माह पूर्व ही बगीचे खरीदने वाले व्यापारी घाटी में आ जाते थे। इनमें अधिकतर स्थानीय व्यापारी होते थे।
80 फीसदी बागवान बगीचा ठेके पर देने के बाद चौखी कमाई करते थे। जुलाई के पहले सप्ताह से जिले के अधिकतर निचले क्षेत्रों में नाशपाती का तुड़ान जोरों से शुरू जाएगा। ऐसे में बागवानों ने स्वयं ही नाशपाती तुड़ान की तैयारियां करना शुरू कर दी हैं। हालांकि कुछ जगहों से छिटपुट नाशपाती मंडियों में आने लगी है। बताया जा रहा है कोरोना में स्थानीय व्यापारी किसी तरह का जोखिम नहीं उठा रहे हैं। इस बार फसल बंपर हैं। ऐसे में दाम भी कम रहने के आसार हैं। बागवान रमेश कुमार, दिले राम, नंद लाल, त्रिलोक चंद, नाथू राम, गीप चंद, सुमा देवी, दासी देवी ने कहा कि नाशपाती के तुड़ान का समय आ चुका है। लेकिन इस बार स्थानीय व्यापारियों ने सेब व नाशपाती के बगीचे खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। जब बागवान अपने बगीचों को ठेके पर देते हैं तो उन्हें घर पर ही एकमुश्त रकम मिल जाती है। कई व्यापारी किस्तों में भी अदायगी करते हैं। उन्हें तुड़ान, ढुलान आदि का झंझट नहीं होता। कई बार मंडियों में दाम कम मिलने के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। बगीचा ठेके पर देने से उन्हें इस तरह की परेशानी नहीं होती। नाशपाती के शुरूआती दौर में कम दाम मिलने से बागवान चिंतित हैं। सदर फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन के महासचिव सुनील राणा ने कहा कि बागवानों को उत्पादों के बेहतर दाम मिले, इसके लिए संगठन की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।