खराहल (कुल्लू)। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में तीन सौ से अधिक देवी-देवता विराजमान हैं। सभी देवताओं के अपने-अपने नियम हैं। इन नियमों का पालन हारियान और देवलू सदियों से करते आ रहे हैं। ऐसा ही एक नियम कुल्लू की लगघाटी के डुपकन गांव में देवता फलानी नारायण के आदेश पर लागू है।
गांव में बीड़ी, सिगरेट और तंबाकू से बने पदार्थ लाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। देवता फलानी नारायण तंबाकू के सख्त खिलाफ हैं। यही कारण है कि उनके मंदिर परिसर के साथ पूरे डुपकन गांव में तंबाकू से बने पदार्थ लाने की अनुमति नहीं है। गांव में आने वाले मेहमानों और पर्यटकों को इन नियमों का पालन करना पड़ता है। देवता के अनुयायी कुल्लू दशहरा के दौरान उनके अस्थायी शिविर में भी इस परंपरा का पूरी श्रद्धा के साथ पालन करते हैं। देवता के अधीन आने वाले क्षेत्र में इन नियमों की अवहेलना करने पर देवता की ओर से दंडित किए जाने की मान्यता है।
देव महाकुंभ के दौरान सात दिनों तक चलने वाले अस्थायी शिविर में बीड़ी, तंबाकू और गुटका सहित इन पदार्थों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहता है। हारियान, देवलू और देवता के कारकून इस परंपरा का पालन करते हैं। देवता फलानी नारायण का तंबाकू के प्रति विरोध एक प्रचलित जनश्रुति से भी जुड़ा है। मान्यता के अनुसार, एक बार भैरों नाथ देवता फलानी नारायण के पीछे पड़ गए थे। उनसे बचने के लिए देवता ने भंवरे का रूप धारण किया और तंबाकू के फूल में छिप गए। देवता ने तंबाकू के पौधे से अपने छिपने की जगह किसी को नहीं बताने को कहा, लेकिन पौधे ने भैरों नाथ को उनके छिपने का स्थान बता दिया। इस घटना के बाद देवता फलानी नारायण तंबाकू से नाराज हो गए। इसी जनश्रुति के आधार पर मंदिर परिसर और गांव में तंबाकू पर प्रतिबंध की परंपरा सदियों से चली आ रही है। संवाद