फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kullu News: पर्यटकों की पसंदीदा मंजिल बनीं रूपी रैला की वादियां

Sat, 17 Jan 2026 10:48 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
विज्ञापन
विज्ञापन
सैलानियों को आकर्षित कर रही ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की गोद में बसी घाटी
विज्ञापन

शांत फिजा और झरने कर रहे आकर्षित, पर्यटन कारोबार को मिल रहा नया संबल
नेशनल पार्क में पाए पाते हैं कई प्रजातियों के जीव-जंतु, जड़ी-बूटियों की भी भरमार
संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। मनाली, पार्वती और तीर्थन जैसी प्रसिद्ध घाटियों के बाद अब सैंज घाटी की रूपी रैला वादियां पर्यटकों की पसंदीदा मंजिल बनती जा रही हैं।
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की गोद में बसी यह घाटी अपनी शांत फिजा, घने जंगलों, झरनों और दुर्लभ जैव विविधता के कारण सैलानियों को आकर्षित कर रही है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव के बावजूद यहां सालभर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से पर्यटन कारोबार को नया संबल मिल रहा है। घाटी के शैंशर, शांघड़ के साथ रूपी रैला की वादियां पर्यटकों से गुलजार होने लगी हैं। रूपी रैला का आधे से ज्यादा क्षेत्र ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में आता है।
क्षेत्र में भाट कंडा, रयलू थाच, रीड़ वन, शोचा माता, कसल धार, मझान, गातिपाट, बाइच, आपगण, कालीधार, ऊखल, दुआदा, बागरी, खड़ा धार, रोपड़, रयलु टापरा, मुथाविहाली सहित कई ऐसे स्थान हैं जहां सालभर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। मूलभूत सुविधाएं न होने पर भी यहां की वादियां और जैविक विविधता पर्यटकों को खींचती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

ग्रेट हिमालय नेशनल पार्क के रोपड़ नामक स्थान का अद्भुत दृश्य भी मनमोहक है। नेशनल पार्क होने से पर्यटक वन्य जीव भी देख सकते हैं। यहां चीता, भालू, घोरल, कक्कड़, जाजुराना, मोनाल जीवों के साथ कई औषधीय जड़ी-बूटियां भी मौजूद हैं। द इको टूरिज्म को-ऑपरेटिव सोसायटी के अध्यक्ष केहर सिंह, बालमकुंद, राकेश नेगी और छापे राम नेगी ने कहा कि सैंज घाटी के रूपी रैला भी पर्यटक पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही मूलभूत सुविधाओं का अभाव है लेकिन यहां तेजी से हेाटल और होमस्टे का निर्माण हो रहा है। इससे युवा अपना रोजगार चला रहे हैं। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क होने से भी घाटी को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिल रही है। सैंज में बहने वाली पिन पार्वती नदी के उद्गम स्थल को देव परंपरा में बहुत पवित्र माना जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें