इस बार नई पहल का गवाह बनेगा दशहरा, आपदा प्रभावितों के जख्मों पर लगेगा मरहम
खर्चों में कटौती कर बचाया जाएगा धन, विदेशी और बॉलीवुड कलाकारों का खर्चा बचेगा
गौरीशंकर
कुल्लू। जब वादियों में नगाड़ों की गूंज धीमी पड़ जाए और देव रथों की राह में आंसुओं की नमी ठहर जाए, तब पर्व केवल उल्लास नहीं रहता, वह उत्तरदायित्व बन जाता है।
कुल्लू का दशहरा इस बार सिर्फ देवताओं के स्वागत का पर्व नहीं होगा, बल्कि उन चेहरों की तलाश करेगा जो आपदा की चुप्पियों में आज भी टूटे घरों की दीवारें जोड़ रहे हैं। आस्था का महाकुंभ आपदा में छिने आशियानों की भी नींव रखेगा।
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा इस बार नई पहल का गवाह बनेगा। परंपराओं और धार्मिक आस्था के साथ उत्सव आपदा प्रभावितों के जख्मों पर मरहम लगाने का जरिया बनेगा। इसके आयोजन से जुटी राशि परंपरा का निर्वहन करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे उन परिवारों तक पहुंचाया जाएगा जो आपदा की मार से मुश्किलों से जूझ रहे हैं। दशहरा उत्सव समिति ने इस बार उत्सव को लेकर थीम भी आपदा से उत्सव की ओर तय की है। इस बार जून के अंत से सितंबर के प्रथम सप्ताह तक प्राकृतिक आपदा ने लोगों को झकझोर दिया है। लोगों ने घरों के साथ जमीनें भी खो दी हैं। परिवार के सदस्यों को भी खोया है। जिले के लोगों को आपदा से गहरे जख्म मिले हैं। इनसे उबरने के लिए दशहरा उत्सव समिति ने अंतरराष्ट्रीय दशहरा में प्लाॅटों और अन्य सोर्स से होने वाली आय को आपदा से उभरने के लिए खर्च करने का निर्णय लिया है।
प्लॉट आवंटन है आय का साधन
दशहरा उत्सव में समिति का मुख्य आय का साधन प्लाॅट आवंटन है। इससे पिछले वर्ष 10 करोड़ से अधिक का राजस्व एकत्रित हुआ था। इस बार अब तक साढ़े 8 करोड़ से अधिक धन जुटाया जा चुका है। यह दस करोड़ से अधिक पहुंचने की उम्मीद है। अभी 20 प्रतिशत प्लाॅटों का आवंटन बाकी है। आयोजन के खर्चे के बाद बचने वाली राशि आपदा प्रभावितों पर खर्च करने की योजना है।
दशहरा उत्सव में एकत्रित होने वाले धन से करोड़ों रुपये आपदा प्रभावितों के जख्मों पर मरहम लगाने पर खर्च किए जाएंगे। इस बार दशहरा आपदा से उत्सव की ओर थीम पर मनाया जा रहा है। इसे देखते हुए समिति ने खर्चे में कटौती की है। अंतरराष्ट्रीय और बॉलीवुड कलाकारों पर खर्च होने वाली राशि को बचाया जा रहा है। - सुंदर सिंह ठाकुर, विधायक एवं अध्यक्ष दशहरा उत्सव समिति