भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम के बाद भी नहीं बढ़ पाया पर्यटन कारोबार
पर्यटन कारोबारी निराश, बोले- घाटी में पर्यटकों का न आना चिंता का विषय
संवाद न्यूज एजेंसी
सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। भारत-पाक के बीच युद्ध विराम के बाद जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की वादियों में भी सैलानियों की आमद घट गई है। घाटी में पर्यटन रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।
मनाली और लाहौल में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। बुधवार को राहनीनाला के लिए गुलाबा बैरियर होकर 563 वाहनों ने दस्तक दी। अटल टनल होते हुए कोकसर और ग्रांफू की तरफ करीब 300 वाहनों में सैलानी पहुंचे।
मई-जून के सीजन की आस लगाए बैठे मनाली और कोकसर के पर्यटन कारोबारी मायूस नजर आ रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान के साथ युद्ध विराम की घोषणा हो चुकी है। बावजूद इसके मनाली और लाहौल में पर्यटकों की संख्या में इजाफा नहीं होना चिंताजनक है। आने वाले समय में भी यदि इसी तरह चलता रहा तो खासकर उन कारोबारियों को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है, जिन्होंने मनाली और लाहौल के विभिन्न भागों में होटल और अन्य गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और ढाबे लीज पर ले रखे हैं। कारोबारियों की मानें तो उन्हें उम्मीद थी कि मई और जून के सीजन में कारोबार अच्छा होगा और लीज के पैसे पूरे कर पाएंगे, लेकिन पर्यटकों का नहीं आना सभी कारोबारियों के लिए चिंता का विषय है। कोकसर पंचायत के एटीवी यूनियन के प्रधान आशीष बौद्ध ने बताया कि मई और जून में मनाली के साथ रोहतांग दर्रा कोकसर ग्रांफू का स्नो पॉइंट काफी अच्छा चलता था। इस बार हालात बिगड़ने से कई बुकिंग रद्द हो गई हैं। उसके बाद युद्धविराम के बाद भी कोकसर में पर्यटकों की आवाजाही में भारी कमी आई है।
स्की ट्यूब के प्रधान प्रदीप ने बताया कि पर्यटकों की संख्या में कमी आने से कारोबारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मई-जून में भी पर्यटकों की आवाजाही नहीं हुई तो कारोबारियों को आर्थिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उधर, कोकसर पंचायत के प्रधान सचिन मिरूपा ने बताया कि इस बार मई में पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आई है। पिछले सोमवार के बाद स्नो पॉइंट ग्रांफू और बाईपास में भी बहुत ही कम पर्यटक पहुंच रहे हैं, जिससे इस बार पूरी पंचायत के कारोबारियों के कारोबार में भारी कमी आ रही है।