न्यूली (कुल्लू)। जिला कुल्लू में पिछले चार माह से बारिश और बर्फबारी न होने का सबसे बुरा असर पर्यटन कारोबार पर पड़ रहा है। सैंज घाटी का प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल शांघड़ इन दिनों सैलानियों की राह ताक रहा है। कभी पर्यटकों और श्रद्धालुओं से गुलजार रहने वाला यह क्षेत्र आज सूना पड़ा है, जिससे स्थानीय होमस्टे मालिकों और पर्यटन कारोबारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
शांघड़ की पहचान देवता शंगचूल महादेव का भव्य मंदिर और करीब 200 बीघा में फैला मखमली हरा मैदान है। आमतौर पर इन दिनों यह मैदान बर्फ की सफेद चादर से ढका रहता है, लेकिन इस बार सूखे ने मैदान की हरियाली छीन ली है। पर्यटन कारोबारी सोमदेव, रोहित और आकाश का कहना है कि सैलानी कुल्लू-मनाली में बर्फ न पाकर अब सीधे लाहौल-स्पीति का रुख कर रहे हैं। इससे सैंज घाटी के विंटर टूरिज्म को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पर्यटन कारोबारी सोमदेव, रोहित, आकाश, अमन ने कहा कि बारिश और बर्फबारी न होने से सैंज घाटी का पर्यटन पूरी तरह ठप पड़ गया है। रही-सही कसर खराब सड़कों ने पूरी कर दी है। पर्यटक यहां आने के बजाय लाहौल की ओर जा रहे हैं, जिससे हमारा सारा निवेश डूबने की कगार पर है।
हिचकोले खाकर पहुंच रहे भूले-भटके पर्यटक
शांघड़ के पर्यटन को केवल मौसम ही नहीं, बल्कि बदहाल सिस्टम भी चोट पहुंचा रहा है। सैंज-शांघड़ मार्ग की स्थिति रोपा से आगे इतनी दयनीय है कि यहाँ सफर करना किसी आफत से कम नहीं। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे पड़े हैं। यदि कोई पर्यटक भूले-भटके शांघड़ आ भी जाए, तो खराब सड़क के कारण वह दोबारा यहाँ आने का नाम नहीं लेता। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में घाटी का विकास रुक गया है।