जिला कुल्लू के पिपलागे में मां नैना की जाग उत्सव के दौरान आग के दहकते अंगारों पर देवनृत्य करते
परंपरा... दैवीय शक्ति का प्रमाण देखकर श्रद्धालु रह गए दंग
पिपलागे में देवविधि के साथ माता नैणा का जाग उत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। भुंतर के समीप पिपलागे में माता नैणा का 25वां जाग उत्सव देवविधि के साथ हुआ। जाग उत्सव में माता भद्रकाली, माता कोयला, माता शीतला कारकूनों सहित शामिल हुईं। इस दौरान दहकते अंगारों पर माता के गूर व चेलियां नंगे पांव चले। यह दृश्य देखकर श्रद्धालु दंग रह गए। देव शक्ति से किसी के पैरों में कोई चोट नहीं पहुंची।
शनिवार शाम 5:00 बजे के बाद माता नैणा के मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। इसके बाद मंदिर में भजन-कीर्तन का सिलसिला शुरू हुआ। माता के पुजारी अमित महंत ने ..मंदिर में शोभला सा तेरा दरबार, ...तेरे मंदिर रा नजारा, ...आज होना दीदार मईया दा, ...मां नैणा महामाया भजन से माहौल भक्तिमय बनाया। खुशबू भारद्वाज ने ...महादेवा ओ महादेवा, ..झुण-मूणं केरदी ऐजे मेरी महामाई, ..वे मनमोहने बालकनाथा आदि भजन पेश किए। रात्रि 2:00 बजे माता नैणा, माता भद्रकाली ने कारकूनों, हारियानों सहित ढोल-नगाड़े के साथ मंदिर में प्रवेश किया। इसके बाद मंदिर में अंगारों के चारों ओर परिक्रमा की। परिक्रमा के दौरान वाद्ययंत्रों की स्वरलहरियों से पूरा माहौल गूंज उठा। जाग की खास बात यह है कि यहां पर माता के गूर, चेलियां, जलते हुए आग के अंगारों पर चले लेकिन उन्हें कोई चोट नहीं आई। भद्रकाली माता के पुजारी अमित महंत ने कहा कि जाग उत्सव में माता ने सभी श्रद्धालुओं के कष्टों का निवारण किया है। श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में चाकरी कर आशीर्वाद प्राप्त किया है।