लोग बोले - विद्युत लाइन बिछाने की अनुमति नहीं मिल रही तो सौर ऊर्जा से रोशन कर दो गांव
विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के अधीन आते हैं गांव, नहीं मिल रही लाइन बिछाने की अनुमति
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। देश की आजादी के 77 साल बाद भी सैंज घाटी के दुर्गम गांवों शाक्टी, मरोड़, कुटला और शुगाड़ में बिजली का बल्ब नहीं जल पाया है। तीनों गांवों के ग्रामीण अभी बिजली की राह ताक रहे हैं।
ग्रामीण अब सरकार, जिला प्रशासन और बिजली बोर्ड से सौर ऊर्जा के माध्यम से गांवों को रोशन करने की मांग कर रहे हैं। बता दें कि विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के अधीन आने वाले इन गांवों में बिजली लाइन बिछाने की अनुमति नहीं मिल रही है।
बिजली लाइन बिछाने के लिए तैयार फाइल दफ्तरों में धूल फांक रही है। इस कारण सैकड़ों ग्रामीणों को अंधेरे में जीवन यापन करना पड़ रहा है। गौर रहे कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क का क्षेत्र होने के कारण इन दुर्गम गांवों के लिए बिजली लाइन बिछाने की अनुमति नहीं मिल रही है। इससे डिजिटल भारत के सरकारी दावों की पोल खुल रही है। ग्रामीण हिराचंद, डोला राम, जीत राम, शेर सिंह निमत राम, भाग चंद, डाबे राम ने कहा कि बिजली से चलने वाले उपकरणों का उपयोग करना तो ग्रामीणों के लिए सिर्फ एक सपना बना हुआ है। उन्होंने सरकार, प्रशासन व बिजली बोर्ड से उपरोक्त गांवों में सोलर प्लांट स्थापित करने की मांग की है। उधर, बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता जितेंद्र बिष्ठ ने कहा कि शाक्टी, मरोड़, शुगाड और कुटला तक बिजली पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।
सैंज घाटी के दुर्गम गांवों शाक्टी, मरोड़, कुटला और शुगाड़ में बिजली न होने से अंधेरे में जीवन-यापन करना पड़ रहा है। इससे सबसे अधिक परेशानी बच्चों को उठानी पड़ रही है। वे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण बिजली उपकरणों का उपयोग कर कामकाज आधुनिक तकनीक से नहीं कर पा रहे हैं। -तेजू राम, शाक्टी
शाक्टी, मरोड़, कुटला और शुगाड़ के लिए लाइन से बिजली नहीं पहुंच सकती है तो सोलर प्लांट स्थापित किए जा सकते हैं। इससे बिजली लाइन बिछाने से कम खर्च और भूमि लगेगी। सरकार, प्रशासन और बिजली बोर्ड को इस दिशा में पहल करनी चाहिए, ताकि दुर्गम गांव रोशन हो सकेंगे। -निर्मला देवी, वार्ड सदस्य शाक्टी।