गांव चिह्नित कर सरकार से की गई है भू वैज्ञानिकों से सर्वेक्षण करवाने की सिफारिश
भारी बारिश और भूस्खलन ने मचाई है तबाही, घर छोड़ सुरक्षित जगह में रह रहे प्रभावित
राजीव नैय्यर
कुल्लू। जिले की घाटियों में बारिश और भूस्खलन ने गांवों की नींव हिला दी है। कुछ गांव उजड़ चुके हैं, कुछ उजड़ने के कगार पर हैं। प्रशासन ने अब उन 12 गांवों को चिह्नित किया है जिनका भविष्य एक सवाल बन चुका है।
ये गांव फिर बस सकेंगे या नहीं, इसका जवाब अब भू वैज्ञानिकों की टीम देगी। सर्वे की रिपोर्ट तय करेगी कि कौन अपने घर लौटेगा और कौन हमेशा के लिए बेघर हो जाएगा।
जिले भर में भारी बारिश और भूस्खलन ने तबाही मचाई है। गांव धंस रहे हैं। प्रभावित परिवारों को आशियाने छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है। वे रोजाना धंस रही जमीन, चट्टानों और दरारों से भरे गांवों में जिंदगी के लिए पल-पल जद्दोजहद कर रहे हैं। बारिश ने सैकड़ों परिवारों को बेघर कर दिया है। प्रशासन ने प्रभावितों के बसेरे बचाने को सरकार से भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण करवाने की सिफारिश की है।
सर्वेक्षण से पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि जो गांव भूस्खलन के खतरे की जद में हैं, वे फिर से बस पाएंगे या नहीं। प्रभावित भी टकटकी लगाए हैं कि कब भूवैज्ञानिक उनके गांव आएंगे। प्रशासन ने उपमंडल कुल्लू, बंजार और मनाली में गांव चिह्नित किए हैं। जिले के 12 गांवों में भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण करवाने की सिफारिश की गई है।
एसडीएम कुल्लू निशांत कुमार ने बताया कि सात गांव चिह्नित किए हैं जहां सरकार से सर्वेक्षण करवाने की सिफारिश की गई है। उधर, बंजार के एसडीएम पंकज शर्मा ने बताया कि बंजार के चार और एसडीएम मनाली रमण शर्मा ने बताया कि मनाली में एक गांव चिह्नित किया है।
इन गांवों का सर्वेक्षण करवाने की सिफारिश
भारी बारिश और भूस्खलन से उपमंडल कुल्लू के गांवों को अधिक खतरा बना हुआ है। उपमंडल के बागन, दलीघाट, छरूडू, शिला, पतलीकूहल, कटराईं, दुआड़ा को भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए चयनित किया है। उपमंडल बंजार के घलियाड, टलिंगा, टिचना और शरण बिहाली, उपमंडल मनाली का सोलंग गांव इस सूची में शामिल है।